Nainital News:ज्योलीकोट दूषित पानी मामला: हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अधीक्षण अभियंता समेत 6 इंजीनियर निलंबित, EE को चेतावनी
नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति और इसके कारण बीमारी फैलने के मामले में जल संस्थान और जल निगम के अधीक्षण अभियंता समेत छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है।
इसके अलावा जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को चेतावनी दी गई है।
ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल से कई लोग बीमार हो गए थे। हाईकोर्ट ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाया था। सोमवार को जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने तीन इंजीनियरों को सस्पेंड करने के आदेश किए। मुख्य महाप्रबंधक के अनुसार हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, सहायक अभियंता नैनीताल मोहन सिंह रावत और अपर सहायक नैनीताल रविंद्र को सस्पेंड कर दिया गया है। अधिशासी अभियंता नैनीताल अनीश एम पिल्लई को मामले में लापरवाही पर चेतावनी जारी की है।
🌸दो मौतों के बाद बढ़ा था जनाक्रोश
ज्योलीकोट क्षेत्र में 20 जून से फैली जलजनित बीमारी (पीलिया और डायरिया) से दो लोगों की मौत हो गई और 400 से अधिक लोग बीमार पड़ गए। पेयजल में लापरवाही को लेकर स्थानीय निवासियों के प्रदर्शन के बाद हाईकोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और जल संस्थान ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, घर-घर सर्वे, रक्त व पानी की जांच और क्लोरीनेशन का कार्य शुरू किया। साथ ही टैंकरों से जल आपूर्ति, टैंकों की सफाई और सीवर लाइन दुरुस्त कराने जैसे कदम उठाए गए।
🌸गलत सूचना पर नपे जल निगम के इंजीनियर
जल संस्थान के बाद जल निगम के एमडी रणवीर सिंह चौहान ने प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह को सस्पेंड करने के आदेश किए। साथ ही मुख्य अभियंता संजय सिंह ने प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्य और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु को सस्पेंड करने के आदेश किए। इनके खिलाफ डीएम की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई। 22 अगस्त को जिला योजना और विभागीय समीक्षा बैठक में इन अभियंताओं ने संबंधित पेयजल लाइन के विभागीय न होने की गलत सूचना दी थी।
🌸यह है मामला
ज्योलीकोट में दूषित पेयजल के मामले में रवि बिष्ट ने जनहित याचिका दायर की थी। आरोप था कि जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों ने जल स्रोतों की सफाई और जल की गुणवत्ता के लिए सैंपलिंग का काम गंभीरता से नहीं किया। ज्योलीकोट में बीमारी के प्रकोप की जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया। जल निगम के अधिकारी लाइन के विभागीय होने से भी मुकर गए थे।