Dehradun News:सितारगंज तहसील में विजिलेंस की कार्रवाई पर बवाल: कर्मियों ने मुख्य गेट बंद कर टीम को बनाया बंधक, 24 घंटे से हाईवोल्टेज ड्रामा
विजिलेंस की कार्रवाई पर बवाल, तहसील में 24 घंटे से हाईवोल्टेज ड्रामा
उधम सिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा और उनके सहायक भूपेंद्र को 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार करने पहुंची विजिलेंस टीम खुद ही विवादों में घिर गई। कार्रवाई के दौरान तहसील कर्मियों ने विरोध जताते हुए तहसील परिसर के मुख्य गेट बंद कर दिए, जिससे विजिलेंस की टीम लंबे समय तक अंदर ही फंसी रही। इस घटनाक्रम के बाद सरकारी तंत्र में हड़कंप मच गया।
मामले को लेकर तहसील कर्मचारियों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कर्मचारियों का कहना है कि जिस व्यक्ति की शिकायत पर कार्रवाई की गई, वह कथित रूप से शराब तस्करी से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं कर्मचारियों का यह भी दावा है कि आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जमा होने के बाद वसूले जाने वाले कुछ वैधानिक खर्चों को शिकायतकर्ता ने रिश्वत के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि उनके अनुसार यह प्रक्रिया राजस्व से संबंधित है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर विजिलेंस का पक्ष है कि उसे मिली शिकायत के आधार पर नियमानुसार ट्रैप की कार्रवाई की गई और साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी की गई है। मामले की जांच जारी है।
घटना के 24 घंटे बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। पुलिस, विजिलेंस और राजस्व विभाग के बीच तनातनी का माहौल बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने संवेदनशील मामले में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय पहल अब तक सामने क्यों नहीं आई। डीएम, एसएसपी और मंडल स्तर के अधिकारियों की ओर से विवाद को समाप्त कराने के लिए कोई ठोस हस्तक्षेप न होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले से विभिन्न प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे उधम सिंह नगर में इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस विवाद का समाधान किस तरह करता है।