बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने मनाई ऐतिहासिक दिवाली, कहा— ‘हर जिला नक्सल मुक्त, अब दिमागी नक्सलियों से सतर्क रहने की जरूरत’
बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने मनाई ऐतिहासिक दिवाली, कहा— ‘हर जिला नक्सल मुक्त, अब दिमागी नक्सलियों से सतर्क रहने की जरूरत’
– प्रधानमंत्री ने जवानों को बताया अपना परिवार, कहा- ‘कल तक जहां नक्सलियों का कहर था, आज वहां विकास की बहार है’ – वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ निर्णायक जंग जीतने पर देश के वीर जवानों के अदम्य साहस को किया नमन
बस्तर (छत्तीसगढ़): दीपावली के पावन पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी परंपरा को निभाते हुए छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचकर सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपोत्सव मनाया। प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह विशेष संदेश रहा है कि देश की सीमाएं हों या दुर्गम जंगल, कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाले प्रहरी ही उनका असली परिवार हैं। बस्तर की इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने जवानों के बीच रहकर मिठाइयां बांटी और उन्हें संबोधित करते हुए देश की एक बड़ी आंतरिक सुरक्षा की सफलता को देश के सामने रखा।
यह दिवाली ऐतिहासिक: देश का हर जिला नक्सल मुक्त
जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बेहद गर्व के साथ कहा कि यह देश की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक दिवाली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहली ऐसी दिवाली है जब देश का हर एक जिला नक्सलवाद और माओवादी आतंक के साये से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। दशकों की लंबी और कठिन लड़ाई के बाद वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ निर्णायक जंग में देश को यह सफलता मिली है, जिसका पूरा श्रेय हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को जाता है।
प्रधानमंत्री ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब बस्तर और आसपास के जंगलों में गोलियों की गूंज और बारूद की बू हुआ करती थी, लेकिन आज उसी बस्तर में भय का साम्राज्य समाप्त होकर विकास की नई बहार आ चुकी है।
‘हर जवान मेरा परिवार है’
त्योहार के इस उल्लासपूर्ण अवसर पर अपनों से दूर देश की हिफाजत में तैनात जवानों के बीच पहुंचे पीएम मोदी ने कहा कि वे अपने परिवार के बीच ही दिवाली मनाने आए हैं। उन्होंने कहा, “देश के कोने-कोने में लोग अपने परिवारों के साथ यह पर्व मना रहे हैं, ऐसे में मेरा भी यह दायित्व है कि मैं अपनी सेना और सुरक्षा बलों के वीर जवानों के साथ इस उजाले के पर्व का आनंद लूं।” उन्होंने सुरक्षा बलों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने जो बलिदान दिए हैं, पूरा देश उनका ऋणी है।
‘जंगलों से नक्सली मिटे, अब दिमागी नक्सलियों से सतर्क रहने की जरूरत’
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण और कड़ी चेतावनी देते हुए देश को आगाह किया। उन्होंने कहा कि भले ही सुरक्षा बलों ने बंदूकों के जोर पर जंगलों से नक्सलियों का सफाया कर दिया हो, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सलियों’ (Urban/Intellectual Naxals) से सतर्क रहने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये छिपे हुए वैचारिक नक्सली विभिन्न संगठनों और व्यवस्थाओं में घुसपैठ कर भोले-भाले नागरिकों को भ्रमित करने का षड्यंत्र रचते हैं। देश की आंतरिक शांति और प्रगति को बनाए रखने के लिए इस नए मोर्चे पर भी वैचारिक रूप से सतर्क और एकजुट रहने की जरूरत है।
आंतरिक सुरक्षा से ही राष्ट्र का उत्थान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में रेखांकित किया कि मजबूत आंतरिक सुरक्षा ही किसी भी राष्ट्र की प्रगति की नींव होती है। जब देश के भीतर शांति और कानून का राज मजबूत होता है, तभी देश आर्थिक और सामाजिक रूप से ऊंचाइयों को छू सकता है। इस दौरे ने एक तरफ जहां बस्तर के सुरक्षा बलों में भारी उत्साह का संचार किया, वहीं पूरे देश में राष्ट्रवाद और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का एक मजबूत संदेश दिया है।
