सूपी गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
सूपी गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
अल्मोड़ा: भाकृअनुप – विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के कुशल निर्देशन में चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत आज विकासखंड मुक्तेश्वर के सूपी गांव में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें स्थानीय किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सहभागिता: कार्यक्रम में कुल 40 किसानों ने प्रतिभाग किया, जिनमें 28 पुरुष और 12 महिला किसान शामिल रहीं।
समन्वयक: इस जागरूकता कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वयन संस्थान के वैज्ञानिकों—डॉ. निर्मल कुमार हेड़ाऊ, डॉ. सुशील कुमार और डॉ. शरणप्पा हल्लिकेरी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुशील कुमार ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए टिकाऊ कृषि उत्पादन के लिए मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करने और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. शरणप्पा हल्लिकेरी ने जानकारी दी कि मृदा परीक्षण के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करने से खेतों में पोषक तत्वों की कार्यक्षमता बढ़ती है, मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और रासायनिक खादों के अनावश्यक खर्च व उपयोग को कम करने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. निर्मल कुमार हेड़ाऊ ने किसानों के साथ सीधा संवाद किया और खेती-किसानी में आ रही प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की। इस दौरान किसानों ने निम्नलिखित मुख्य समस्याएं साझा कीं:
सिंचाई के लिए पर्याप्त जल संसाधनों की कमी।
मृदा परीक्षण के लाभों को लेकर जागरूकता का अभाव।
जंगली जानवरों (विशेषकर बंदरों और जंगली भालुओं) द्वारा फसलों को पहुंचाया जाने वाला नुकसान।
ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार पलायन की समस्या।
कृषि निवेशों और उपयोगी तकनीकी जानकारी का समय पर उपलब्ध न होना।
किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए खेतों पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन, फसल सुरक्षा के पुख्ता उपायों, कृषि आदानों की समयबद्ध आपूर्ति तथा हल्की और आसानी से चलाई जा सकने वाली कृषि मशीनों की उपलब्धता की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों को जागरूक कर कृषि की उत्पादकता, स्थिरता और दीर्घकालिक टिकाऊपन को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय स्तर पर किसानों की आय और आजीविका को मजबूत बनाया जा सके।
