पटवारी-लेखपाल भर्ती परीक्षा: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 3 सवालों के उत्तर पर सरकार और आयोग से 4 हफ्तों में माँगा जवाब

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पटवारी-लेखपाल भर्ती परीक्षा: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 3 सवालों के उत्तर पर सरकार और आयोग से 4 हफ्तों में माँगा जवाब

 

 

 

 

कोर्ट का स्पष्ट रुख: अंतिम चयन याचिका के फैसले के अधीन रहेगा; अभ्यर्थियों की धड़कनें बढ़ीं

 

 

 

राज्य में पहले पेपर लीक विवाद और अब सवालों की गड़बड़ी ने एक बार फिर पटवारी-लेखपाल और वीडियो (BDO) भर्ती परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ग्रुप ‘सी’ भर्ती परीक्षा के तीन सवालों के उत्तरों पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) समेत सभी संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चार हफ्तों के भीतर इन सवालों के सही उत्तर दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

 

 

 

 

 

भर्ती परिणाम हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर

माननीय उच्च न्यायालय ने हालांकि वर्तमान में परीक्षा परिणाम पर पूर्ण रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन अपने आदेश में यह साफ कर दिया है कि अभ्यर्थियों का अंतिम चयन इस याचिका पर आने वाले अंतिम फैसले के अधीन रहेगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट इन तीन सवालों के उत्तरों को गलत पाता है या नए उत्तर स्वीकार करता है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया के मेरिट लिस्ट पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में मेरिट सूची को दोबारा तैयार करना पड़ सकता है।

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क्या है पूरा मामला?

राज्य के 13 जिलों से सम्बीर सिंह समेत 22 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।

 

 

 

याचिकाकर्ताओं का तर्क: पेपर लीक विवाद के बाद आयोग द्वारा 14 जून को आयोजित कराई गई ग्रुप ‘सी’ परीक्षा में 3 सवाल ऐसे दिए गए थे, जिनके एक से अधिक उत्तर सही ठहरते हैं।

अधिकारियों की अनदेखी: अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा के तुरंत बाद इस गड़बड़ी के संबंध में आयोग के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया।

अदालत का संज्ञान: आयोग की ओर से कोई ठोस समाधान न मिलने पर अभ्यर्थियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है।

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याचिकाकर्ता के वकील शिवम राणा का बयान:  “हमने कोर्ट के सामने यह स्पष्ट किया है कि परीक्षा में पूछे गए तीन प्रश्न तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और उनके बहु-उत्तर (Multiple correct options) बन रहे हैं। आयोग ने अभ्यर्थियों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया, लेकिन कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।”

 

 

 

 

अभ्यर्थियों में रोष और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल

पेपर लीक का दंश झेल चुके अभ्यर्थियों के लिए यह नया विवाद मानसिक तनाव का कारण बन गया है। युवाओं का कहना है कि पहले ही पेपर लीक के कारण भर्तियां अटकी रहीं और अब प्रश्नपत्र तैयार करने वाली विशेषज्ञों की टीम की लापरवाही से लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

 

 

 

 

इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर चयन आयोग और प्रश्नपत्र बनाने वाले विशेषज्ञों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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