Almora News:भाकृअनुप-VPKAS अल्मोड़ा मनाएगा 103वां स्थापना दिवस: 25 फसलों की 204 किस्में विकसित कर पर्वतीय कृषि में रचा इतिहास

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🌸भाकृअनुप – विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थारन, अल्मोड़ा हर्षोल्लास के साथ मनाएगा अपना 103वां स्थापना दिवस
आगामी 4 जुलाई 2026 को भाकृअनुप-विवेकानन्द् पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थाडन, अल्मोड़ा हर्षोल्लास के साथ अपना 103वां स्थापना दिवस मनाएगा । पिछले एक सदी से अधिक समय से संस्थान पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान और विकास के लिए समर्पित है। इस अवसर पर संस्थान की पिछले वर्षों की गौरवशाली उपलब्धियों को रेखांकित करने के साथ ही भविष्य के लिए नई कार्ययोजनाओं पर भी रणनीति बनाएगा । संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के कुशल नेतृत्व में यह संस्थान पर्वतीय कृषि विकास एवं पोषण सुरक्षा हेतु अपने शोध एवं प्रसार कार्यक्रमों से निरंतर प्रयासरत एवं प्रतिबद्ध है। संस्थान ने अभी तक 25 पर्वतीय फसलों की कुल 204 उच्च उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी किस्मों का विकास किया है जो राज्य एवं केंद्र स्तर पर अधिसूचित है ।
संस्थाोन के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने बताया की विगत वर्ष संस्थान के लिए अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियों का साक्षी रहा है। इस अवधि में कुल सात प्रजातियां (मक्का में वी एल लोफी, वी एल सुपोषिता, वी एल मधुबाला, वी एल त्रिपोशी, वी एल पौषिका; मंडुआ में वी एल मंडुवा 410 तथा सब्जी मटर में वी एल श्रेष्ठ) जारी एवं अधिसूचित/अधिसूचना हेतु संस्तुत की गई तथा तीन किस्में (दलहन में 02 एवं जौ में 01) चिन्हित की गई। वी एल मधुबाला (स्वीटकॉर्न हाइब्रिड) को छोड़कर मक्का की सभी किस्में जैव-सुदृढ़ीकृत (बायो-फोर्टिफाइड) हैं। इनमें वी एल त्रिपोशी देश की अपनी तरह की पहली प्रजाति है, जिसमें गुणवत्तायुक्त प्रोटीन, प्रो-विटामिन ए तथा कम फाइटेट गुण एक साथ विद्यमान हैं। इसी प्रकार वी एल सुपोषिता भी देश की पहली प्रजाति है, जिसमें गुणवत्तायुक्त प्रोटीन एवं उच्च जस्ता की मात्रा सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त, काले सोयाबीन की प्रजाति वी एल भट 202 की खेती के लिए अनुशंसित अधिसूचित क्षेत्र का विस्तार हिमाचल प्रदेश तक किया गया। पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अंतर्गत किसानों की पांच किस्में—धान की 03 (रमनलाल धान, दूध धान, बीरानी धान) तथा मंडुआ की 02 (गोल मडुआ एवं झुमकिया मडुआ) पंजीकृत की गई। संस्थान द्वारा अनुशंसित एवं सहयोग प्रदान किए गए किसान श्री भूपेंद्र जोशी, गल्ली बसुरा, अल्मोड़ा को पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “प्लांट जीनोम सेवियर किसान पुरस्कार 2022-23” से सम्मानित किया गया।
संस्थान को नई दिल्ली में आयोजित छठी अंतरराष्ट्रीय फसल विज्ञान कांग्रेस में ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनी’ के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। साथ ही, संस्थान को पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा भी सम्मानित किया गया है। अनुसंधान के क्षेत्र में, संस्थान ने मक्का, सब्जी मटर और सोयाबीन जैसी फसलों की सात नई किस्में विकसित की हैं। इसके अतिरिक्त, 13 फसलों की 38 किस्मों/इनब्रेड्स के माध्यम से 140.04 कुंतल प्रजनक बीज का उत्पादन किया गया है, जो उन्नत कृषि के लिए मील का पत्थर है।
संस्थान का ‘उडेरखानी’ संरक्षित खेती मॉडल किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक प्रभावी जरिया बनकर उभरा है। संस्थान के ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत 437 गाँवों के 6,935 किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया गया, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान करने में मदद मिली है। माननीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 1 जून से 30 जून 2026 तक संस्थान में चले राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर और चमोली जनपदों के विभिन्न गांवों में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों में टिकाऊ कृषि पद्धतियों, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा सरकार समर्थित कृषि विकास योजनाओं के प्रति जागरूकता पैदा करना था। इन कार्यक्रमों में कुल 3,025 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 1,616 महिला किसान सम्मिलित थीं।
संस्थान न केवल अनुसंधान, बल्कि शिक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 17 छात्रों को 90 दिवसीय ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम, प्रायोगिक शिक्षण कार्यक्रम एवं प्रशिक्षुता कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान छात्रों के लिए एक पसंदीदा प्रशिक्षण स्थल के रूप में उभरा है। इसके अतिरिक्त संस्थान द्वारा विकसित 09 प्रमुख प्रौद्योगिकियों का व्यावसायिक हस्तांतरण किया गया है और 18 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 998 कृषकों व अधिकारियों को लाभान्वित किया गया है।
संस्थान के निदेशक ने इस अवसर पर सभी वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के अटूट समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान प्रौद्योगिकी और नवाचार के नए शिखरों को छूने और पर्वतीय कृषि को और अधिक सशक्त बनाने के लिए संकल्पित है।

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