# Almoraमातृभूमि पर न्योछावर हुआ अल्मोड़ा का लाल: राजौरी में ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद**
# मातृभूमि पर न्योछावर हुआ अल्मोड़ा का लाल: राजौरी में ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद**
**अल्मोड़ा।** जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले ने अपना एक और वीर सपूत खो दिया है। 5 असम रेजिमेंट में तैनात होनहार युवा सेना अधिकारी **लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी** देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए हैं। सैन्यभूमि उत्तराखंड के इस वीर सपूत ने जम्मू-कश्मीर में मातृभूमि की सेवा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। माँ भारती की सेवा के प्रति उनका यह समर्पण, अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया गहरा शोक**
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर सपूत की शहादत पर गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा:”सैन्यभूमि उत्तराखंड के वीर सपूत, अल्मोड़ा निवासी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जी ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान मातृभूमि की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। माँ भारती की सेवा के प्रति उनका समर्पण, अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोकाकुल परिजनों को यह असीम कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
**दुर्गम पहाड़ी में तलाशी अभियान के दौरान हुआ हादसा**
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजौरी के बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में सेना द्वारा **’ऑपरेशन शेरूवाली’** के तहत एक तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी खुद इस तलाशी दल का नेतृत्व कर रहे थे। अभियान के दौरान अचानक पैर फिसलने से उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरी खाई में गिर गए।
साथी जवानों ने तत्काल युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाकर उन्हें खाई से बाहर निकाला और सेना के 150 जनरल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। मात्र **25 वर्ष 08 माह की अल्पायु** में उन्होंने अपने प्राण राष्ट्र सेवा हेतु न्यौछावर कर दिए।
#अद्भुत संयोग: ‘6’ तारीख से जुड़ा रहा जीवन और शहादत का सफर**
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के जीवन में एक बेहद भावुक और हैरान करने वाला संयोग सामने आया है। परिजनों के अनुसार, बीरेश्वर का जन्म भी महीने की 6 तारीख को हुआ था, उन्हें भारतीय सेना में कमीशन भी 6 जून 2024 को मिला था और नियति का खेल देखिए कि ठीक दो साल बाद **6 जून** को ही उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
विडंबना:** बेहद दुखद बात यह रही कि महज दो दिन बाद ही बीरेश्वर गोस्वामी को कैप्टन पद पर पदोन्नत (प्रमोट) किया जाना था, लेकिन कंधों पर अगला स्टार लगने से पहले ही वे तिरंगे में लिपट गए।
#विदेशी यूनिवर्सिटी और लॉ को छोड़ चुना था देश सेवा का मार्ग**
मूल रूप से अल्मोड़ा के बग्वालीपोखर (बाड़ी) क्षेत्र के निवासी और वर्तमान में पांडेखोला (अथरबनी) में रहने वाले बीरेश्वर बचपन से ही सेना की वर्दी पहनने का सपना देखते थे। वे बेहद मेधावी छात्र थे।
* उनकी शुरुआती शिक्षा **आर्मी स्कूल रानीखेत** और **सैनिक स्कूल घोड़ाखाल** से हुई।
* इसके बाद उन्होंने **ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय** से स्नातक किया, जहां वे रजत पदक (सिल्वर मेडल) विजेता रहे।
* बीरेश्वर की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एनडीए परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ-साथ **कैट (CAT), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU)** और **इंग्लैंड के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय** में भी प्रवेश पा लिया था। लेकिन उन्होंने कॉर्पोरेट की दुनिया और विदेश जाने के बजाय देश सेवा के कठिन मार्ग को चुना। वे जनवरी 2023 में सेना में शामिल हुए थे।
#परिवार का रो-रोकर बुरा हाल, विधायक ने व्यक्त की संवेदना**
शहीद बीरेश्वर अपने दो भाइयों में छोटे थे और परिवार की आंखों के तारे थे। उनके पिता **श्री प्रमोद नाथ गोस्वामी जी** तहसील भनोली में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता सरस्वती गोस्वामी प्राथमिक विद्यालय वलसा में प्रधानाध्यापिका हैं। परिवार में उनकी बुजुर्ग दादी और एक बड़ा भाई भी है।
अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी ने भी शहीद के आवास पर पहुंचकर शोक संतृप्त परिवार से मुलाकात की और अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
**विशेष सैन्य विमान और हेलीकॉप्टर से लाया गया पार्थिव शरीर**
शहीद की शहादत पर जम्मू में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद तय प्रोटोकॉल के तहत शहीद के पार्थिव शरीर को राजौरी से जम्मू भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा, जम्मू से पंतनगर सेना के विशेष विमान द्वारा तथा पंतनगर से अल्मोड़ा सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा लाया गया।
अल्मोड़ा में तैनात सिख रेजिमेंट के जवानों द्वारा जब उनका पार्थिव शरीर उनके आवास पर लाया गया, तो वहां मौजूद माता-पिता, दादी और सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरा इलाका “लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।
भारत माता के इस वीर सपूत को शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि। शहीद सैन्य अधिकारी का अंतिम संस्कार आज अल्मोड़ा के **विश्वनाथ घाट** पर पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
🇮🇳 *अमर रहें — लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी अमर रहें।* 🇮🇳