Almora News:भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा अनुसूचित जाति के कृषकों हेतु पाँच दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना–कटाई-उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी की अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा, बागेश्वर एवं पौड़ी गढ़वाल जनपदों के अनुसूचित जाति समुदाय के कुल 18 कृषकों के लिए “मिलेट (श्री अन्न) थ्रेशिंग, उन्नत कृषि यंत्र, आटा पिसाई तथा टोफू–सोया दूध उत्पादन ”विषय पर दिनांक 5 से 9 जनवरी 2026 तक पाँच दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने कौशल उन्नयन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में कृषि केवल निर्वाह हेतु अन्न उत्पादन तक सीमित न रहकर उद्यमिता के रूप में स्थापित कर आय अर्जन का सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अत्यंत उपयोगी बताया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृषकों को कटाई उपरांत एवं फसल उत्पादन से संबंधित उन्नत तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया गया। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी वी. एल. मंडुआ थ्रेशर, सोया मिल्क एवं सोया पनीर (टोफू) निर्माण, तथा आटा चक्की संचालन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त मधुमक्खी पालन एवं शहद प्रसंस्करण तकनीकें, मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण, मंडुआ की खेती एवं प्रसंस्करण में कुशल एवं एग्रोनॉमिक प्रथाओं का संवर्धन, वर्मी कम्पोस्टिंग, तथा समेकित कीट प्रबंधन विषयों पर भी विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
‘स्वयं कार्य करके, प्रयोग करके और अनुभव प्राप्त करके सीखने’ के सिद्धांत पर आधारित इस प्रशिक्षण के अंतर्गत कृषकों ने मसाला प्रसंस्करण की तकनीकें भी व्यवहारिक रूप से सीखीं। साथ ही संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न उन्नत कृषि यंत्रों की जानकारी भी कृषकों को प्रदान की गई एवं संस्थान की कार्यशाला एवं मिलेट मूल्य श्रृंखला सुविधा का भ्रमण कराया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक अनूठी पहल रहा, जिसमें कृषकों को कटाई उपरांत तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उनके कौशल का उन्नयन किया गया, जिससे वे कृषि-आधारित गतिविधियों को अपना कर अपने क्षेत्र में स्वयं का उद्यम स्थापित कर सकें। कार्यक्रम के अंतर्गत कृषकों की आजीविका संवर्धन को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना–कटाई– उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी की अनुसूचित जाति उप-योजना के माध्यम से 2 अश्वशक्ति (एचपी) की मोटर से चलने वाली दो आटा चक्कियाँ कृषकों को वितरित की गईं। प्रशिक्षण कार्यक्रम की समाप्ति पर सभी प्रतिभागी कृषकों को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने के उपरांत प्रशस्ति प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समन्वयन डॉ. मनोज कुमार एवं डॉ. कुशाग्रा जोशी द्वारा किया गया ।
