Almora News:भाकृअनुप – विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में “स्वच्छता ही सेवा” अभियान के तहत उपलब्धियों पर प्रकाश डालती प्रेस वार्ता

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भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में आज स्वच्छता ही सेवा अभियान 2025 के अन्तिम दिन, 31 दिसम्बर, 2025 को प्रेस वार्ता का आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वच्छता पखवाड़े के दौरान संस्थान की स्वच्छता गतिविधियों एवं जागरूकता कार्यक्रम को प्रेस एवं मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने हेतु किये गये सामूहिक प्रयासों को दर्शाना तथा अपशिष्ट को संपदा में बदलने का प्रयास करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने उपस्थित प्रभागाध्‍यक्षों, कार्मिकों एवं मीडिया कर्मियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष स्‍वच्‍छता कार्यक्रम तीन बार मनाया गया। दिनांक 16 दिसम्बर से 31 दिसम्बर, 2025 तक चल रहे वर्ष के अन्तिम स्वच्छता पखवाड़े के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कार्मिकों द्वारा 12 स्थलों का भ्रमण कर वहां के जनमानस को स्वच्छता की आवश्यकता एवं स्वच्छता हेतु जागरूक किया गया, जिसमें 1,240 लोगों की सहभागिता रही। स्वछता सेवा अभियान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल परिसर की साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच, कार्य संस्कृति एवं सामाजिक दायित्व से भी गहराई से जुड़ी हुई है। डॉ. कान्त ने अपने संबोधन में कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अपशिष्ट का होना स्वाभाविक है, किंतु अत्यधिक कचरा आज एक गंभीर समस्या का रूप ले रहा है। अतः हम सभी का यह कर्तव्य है कि कूड़े के उत्सर्जन को यथासंभव कम करें, ताकि देश को स्वच्छ, सुंदर एवं पर्यावरण सम्मत बनाया जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों एवं संस्थान के कार्मिकों से आह्वान किया कि वे स्वच्छता को एक सतत प्रक्रिया के रूप में अपनाएँ तथा स्वच्छता ही सेवा की भावना को संस्थान से आगे समाज तक प्रसारित करें। इसके साथ ही निदेशक महोदय द्वारा सभी मीडिया कर्मियों को वर्ष 2025 के दौरान संस्‍थान द्वारा की गयी गतिविधियों एवं महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों से भी अवगत कराया गया।

प्रेस वार्ता के अवसर पर डॉ. मनोज कुमार, स्वच्छता नोडल अधिकारी द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान की गई विभिन्न गतिविधियों की संक्षिप्त आख्या पावर पाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत की गई। उन्होंने बताया कि स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत संस्थान परिसर, प्रयोगशालाओं, कार्यालयों एवं आवासीय क्षेत्रों में साफ-सफाई अभियान, जागरूकता कार्यक्रम, श्रमदान, स्वच्छता संदेशों का प्रसार तथा कर्मचारियों एवं शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता को एक सतत आदत के रूप में अपनाने पर विशेष बल दिया गया।

प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. निर्मल कुमार हेडाऊ, प्रभागाध्‍यक्ष, फसल सुधार, डॉ. कृष्‍ण कान्‍त मिश्रा, प्रभागाध्‍यक्ष, फसल सुरक्षा, डॉ. बृज मोहन पाण्‍डेय, प्रभागाध्‍यक्ष, फसल उत्‍पादन, डॉ. कुशाग्रा जोशी, अनुभागाध्‍यक्ष, सामाजिक विज्ञान, श्रीमती रेनू सनवाल, मुख्‍य तकनीकी अधिकारी, श्रीमती निधि सिंह, सहायक मुख्‍य तकनीकी अधिकारी एवं श्री देवेन्‍द्र सिंह कार्की, वरिष्‍ठ तकनीशियन एवं सदस्‍य सचिव, स्‍वच्‍छता ही सेवा पखवाड़ा अभियान के साथ सभी पत्रकार एवं मीडिया बन्‍धु भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समन्वयन वरिष्‍ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार एवं धन्यवाद प्रस्ताव श्री देवेन्‍द्र सिंह कार्की द्वारा ज्ञापित किया गया।

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संस्‍थान की वर्ष 2025 की उपलब्धियां-
वर्ष 2025 हमारे संस्थान के लिए अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियों का साक्षी रहा है। इस अवधि में कुल सात प्रजातियां (मक्का में वी एल लौफी, वी एल सुपोषिता, वी एल मधुबाला, वी एल त्रिपोशी, वी एल पोषिका; मंडुआ में वी एल मडुआ 410 तथा सब्‍जी मटर में वी एल श्रेष्‍ठा) जारी एवं अधिसूचित/अधिसूचना हेतु संस्‍तुत की गईं तथा तीन किस्में (दलहन में 02 एवं जौ में 01) चिन्‍हित की गईं। वी एल मधुबाला (स्वीटकॉर्न हाइब्रिड) को छोड़कर मक्का की सभी किस्में जैव-सुदृढ़ीकृत (बायो-फोर्टिफाइड) हैं। इनमें वी एल त्रिपोशी देश की अपनी तरह की पहली प्रजाति है, जिसमें गुणवत्‍तायुक्‍त प्रोटीन, प्रो-विटामिन ए तथा कम फाइटेट गुण एक साथ विद्यमान हैं। इसी प्रकार वी एल सुपोषिता भी देश की पहली प्रजाति है, जिसमें गुणवत्‍तायुक्‍त प्रोटीन एवं उच्च जस्‍ता की मात्रा सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त, काले सोयाबीन की प्रजाति वी एल भट 202 की खेती के लिए अनुशंसित अधिसूचित क्षेत्र का विस्तार हिमाचल प्रदेश तक किया गया। पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अंतर्गत किसानों की पाँच किस्में—धान की 03 (रमनलाल धान, दूध धान, बौरानी धान) तथा मंडुआ की 02 (गोल मडुआ एवं झुमकिया मडुआ) पंजीकृत की गईं। संस्थान द्वारा अनुशंसित एवं सहयोग प्रदान किए गए किसान श्री भूपेंद्र जोशी, हवालबाग, अल्मोड़ा को पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “प्लांट जीनोम सेवियर किसान पुरस्कार 2022-23” से सम्मानित किया गया।

बीज उत्पादन के क्षेत्र में, 13 फसलों की 38 जारी किस्मों/इनब्रेड्स का कुल 140.04 कुन्‍तल प्रजनक बीज उत्पादन किया गया, जिसमें से 110.105 कुन्‍तल बीज आगे गुणन हेतु बीज उत्पादक एजेंसियों को उपलब्ध कराया गया। इसके अतिरिक्त, आनुवंशिक शुद्धता के कड़े मानकों का पालन करते हुए 11.861 कुन्‍तल नाभिकीय बीज तथा 8.59 कुन्‍तल सत्‍यापित बीज का उत्पादन किया गया। किसान सहभागी बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत 246.165 कुन्‍तल सत्‍यापित बीज का उत्पादन तथा 232.39 कुन्‍तल सत्‍यापित बीज विभिन्न हितधारकों को आपूर्ति किया गया।

संस्थान द्वारा धान, सोयाबीन, मक्का, गेहूँ एवं मंडुआ फसलों में 140.9 हेक्टेयर क्षेत्र में कुल 635 अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिनसे 735 किसान लाभान्वित हुए। ये अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश में जनजातीय उपयोजना, अनुसूचित जाति उपयोजना तथा उत्‍तर पूर्वी हिमालयी योजना के अंतर्गत संचालित की गईं। वर्ष के दौरान 08 प्रौद्योगिकियाँ नामत: वी एल स्मॉल टूल किट, वी एल व्हाइटग्रब बीटल ट्रैप-1, वी एल वीटा, वी एल क्‍यू पी एम हाइब्रिड 45 (जैव सुदृढ़ीकृत), वी मक्का हाइब्रिड 27, केन्‍द्रीय मक्का वी एल 55, वी एल सब्जी मटर 13 एवं वी एल लहसुन 2 विभिन्न कंपनियों को व्यावसायीकरण हेतु हस्तांतरित की गईं।

अरुणाचल प्रदेश में मंडुआ की प्रजाति वी एल मडुआ 376 का व्यापक क्षेत्र में अपनाया जाना एक उल्लेखनीय सफलता की कहानी के रूप में उभरा है। वी एल मिलेट थ्रेशर एवं वी एल मक्का शेलर की बढ़ती मांग, साथ ही बुलबिल्‍स के माध्यम से लहसुन उत्पादन की अभिनव तकनीक, हमारे सार्थक प्रभाव को दर्शाती है तथा आने वाले वर्षों में महत्‍वपूर्ण प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है।

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वर्ष के दौरान संस्थान द्वारा दो प्रमुख अखिल भारतीय कार्यशालाओं नामत: 16वीं वार्षिक प्याज एवं लहसुन कार्यशाला (13–15 मई 2025) तथा 21वीं कृषि संरचना और पर्यावरण प्रबंधन में प्लास्टिक इंजीनियरिंग वार्षिक कार्यशाला (30 अक्टूबर से 01 नवंबर 2025) का सफल आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त, संस्थान ने पंतनगर में 17वीं कृषि विज्ञान कांग्रेस (20 फरवरी 2025) का सह-आयोजन किया। निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्‍त को “ऊँचाई पर कृषि: पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्रों हेतु नवाचार” विषय पर संगोष्ठी के आयोजन एवं संयोजन का दायित्व सौंपा गया। संस्थान ने गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी, कटारमल, अल्मोड़ा में “हिमालयी विकास हेतु सतत मार्ग: पहाड़ों में कृषि की पुनर्कल्पना” विषयक हिमालयन कॉन्क्लेव (14 नवंबर 2025) का भी सह-आयोजन किया।

परिषद द्वारा डॉ. एस.के. शर्मा, पूर्व कुलपति, चौधरी श्रवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्‍वविद्यालय, पालमपुर की अध्‍यक्षता में गठित पंचवर्षीय पुनर्निरीक्षण दल (QRT) 2018–2024 की अवधि में संस्थान की प्रगति की समीक्षा की गई तथा संस्थान के प्रदर्शन को “उत्कृष्ट” आंका गया।

24 से 26 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL), नई दिल्ली में आयोजित छठी अंतरराष्ट्रीय फसल विज्ञान कांग्रेस के दौरान संस्थान के स्टॉल को “सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनी” के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, किसानों की किस्मों के पंजीकरण हेतु किसानों को प्रेरित एवं सुविधा प्रदान करने के लिए संस्थान को पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा भी सम्मानित किया गया।

“उडेरखानी” संरक्षित खेती मॉडल एवं सहायक उद्यमों के प्रभाव आकलन से यह स्पष्ट हुआ कि यह मॉडल सरकारी सहयोग के साथ सतत है तथा 100 वर्गमीटर के छोटे पॉलीहाउस, 08 मधुमक्खी बक्सों एवं 20 मशरूम थैलों के प्रयोग से ₹60,000/- की शुद्ध आय प्राप्त की जा सकती है।

विकसित कृषि संकल्‍प अभियान के अंतर्गत 29 मई से 12 जून 2025 के दौरान विशेषज्ञों की 60 टीमों द्वारा 16 विकास खंडों एवं 437 गाँवों में कुल 111 भ्रमण किए गए, जिनमें 6,935 किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस अभियान में किसानों, विशेषकर महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रही। इससे वैज्ञानिकों को आधारिक स्तर पर किसानों की समस्याओं, नवाचारों एवं अपेक्षाओं को समझने में सहायता मिली। आशा है कि कृषकों से प्राप्त प्रतिपुष्टि भविष्य के कृषि अनुसंधान एवं नीति निर्माण में मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

भाकृअनुप-विवेकानन्‍द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान, अल्‍मोड़ा छात्रों के लिए एक पसंदीदा प्रशिक्षण स्‍थान के रूप में निरंतर उभर रहा है, जिसका प्रमाण 90 दिवसीय ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) में 17 छात्रों का प्रशिक्षण लेना है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमारी सशक्त उपस्थिति ने संपर्क एवं दृश्यता को और भी सुदृढ़ किया है। वर्ष के दौरान संस्थान द्वारा 26 प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं 07 भ्रमण आयोजित किए गए, जिनसे 916 कृषक/अधिकारी लाभान्वित हुए।

अनुसंधान के क्षेत्र में वर्ष 2025 के दौरान हमारे वैज्ञानिकों ने 27 शोध पत्र, 10 लोकप्रिय लेख तथा 31 सारांश प्रकाशन एवं प्रस्तुति हेतु प्रस्तुत किए।

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