Uttrakhand News :इस विश्वविद्यालय ने नई खोजों के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी की हासिल, किया स्ट्रेपलेस बिना पट्टी का फेसमास्क का अविष्कार

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स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट ने नई खोजों के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने स्ट्रेपलेस (बिना पट्टी का) फेसमास्क का अविष्कार किया है।

इससे स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े चिकित्सकों, नर्सेज, पैरामेडिकल सहित विभिन्न जरूरतमंद लोगों के लिए मास्क लगाने में राहत मिलेगी। विश्विविद्यालय के अध्यक्ष डा. विजय धस्माना व कुलपति डा.राजेंद्र डोभाल ने वैज्ञानिकों को इस कामयाबी के लिए बधाई दी है।

कोविड 19 संकट के दौरान, फेसमास्क पहनना संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए एक अनिवार्य सावधानी बन गया था। औसतन, लोगों को प्रति दिन 10 से 12 घंटे तक मास्क पहनना पड़ रहा था। आम तौर पर बाजार से मिलने वाले हर मास्क में पट्टियां होती है। यह बेहद असुविधाजनक होता था।

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इन्हीं परेशानियों के निराकरण के लिए स्वामी राम हिमालयन विश्विद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने काम करना शुरू किया और स्ट्रेपलेस फेसमास्क का अविष्कार किया। भारत सरकार ने इस अविष्कार का पेटेंट स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट के नाम दर्ज कर लिया है।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविदयालय, जौलीग्रांट के अध्यक्ष डा. विजय धस्माना ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह अविष्कार मानव जाति के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। विश्वविद्यालय का फोकस शोध कार्यो पर है।

💠ऐसे बना है यह फेस मास्क

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स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट में आईपीआर सेल के इंचार्ज प्रो.योगेंद्र सिंह ने बताया स्ट्रेपलेस फेस मास्क दो परतों की फैब्रिक संरचना से बना है, जो एक-दूसरे से अलग होती है। इसे वायरस, बैक्टीरिया और धूल जैसे संक्रामक तत्वों के प्रवेश को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

फैब्रिक की दो परतों के बीच एक धातु की तार (जिसे स्प्रिंग स्टील, एलाय स्टील, कार्बन स्टील कोबाल्ट-निकेल, कापर बेस में से चुना जा सकता है) रखी गई है। मेटालिक तार के कारण मास्क को दिया गया संरचनात्मक स्थिरता बेहतर फिटिंग प्रदान करती है, इससे मास्क में पट्टी (स्ट्रैप) की जरूरत नहीं पड़ती।

 

 

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