उत्तराखंड एसटीएफ की बड़ी कार्यवाही इस फैक्ट्री किया भंडाफोड़

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ब्रांडेड कंपनियों का नकली सीमेंट बनाने की एक फैक्ट्री का पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए नकली सीमेंट के करीब 1250 कट्टे तथा अलग-अलग कंपनियों के 1250 नकली खाली कट्टे बरामद किए हैं

 

 

 

 

 

 

 

इस दौरान पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है जबकि कंपनी का स्वामी फरार बताया जा रहा है।नकली सीमेंट की फैक्ट्री का खुलासा करते हुए एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया कि नकली सीमेंट बनाए जाने से संबंधित कुछ दिनों से सूचनाएं प्राप्त हो रही थी बीती रात्रि मुखबिर की सूचना पर उत्तराखंड एसटीएफ व कोतवाली काशीपुर पुलिस द्वारा एक ज्वांइट ऑप्रेशन के तहत कार्यवाही करते हुए आज प्रातः तड़के काशीपुर क्षेत्र से एक नकली सीमेंट बनाने की फैक्ट्री में छापेमारी कर एक व्यक्ति की गिरफ्तार किया है

 

 

 

 

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तथा फैक्ट्री से अलग-अलग ब्रांडो की 1250 सीमेंट से भरी बोरियां, 1200 खाली कट्टे तथा नकली सीमेंट बनाने के उपकरण बरामद किए हैं। एसटीएफ व कोतवाली काशीपुर पुलिस की संयुक्त कार्यवाही में उत्तराखंड एसटीएफ ने काशीपुर में किया नकली सीमेंट बनाने की फैक्ट्री का खुलासा किया उन्होंने बताया कि काशीपुर क्षेत्र में चोरी छुपे एक नकली सीमेंट की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी जिस पर टीम के द्वारा काशीपुर के टांडा उज्जैन क्षेत्र में एक बड़े गोदाम में छापामारी की गई इस दौरान एक नकली सीमेंट की फैक्ट्री संचालित होती पाई गई।

 

 

 

 

 

 

फैक्ट्री परिसर से दो ट्रक नकली सीमेंट से भरे हुए तथा फैक्ट्री के अंदर से भारी मात्रा में अलग-अलग ब्रांडो का नकली सीमेंट व खाली कट्टे तथा नकली सीमेंट बनाने के उपकरण बरामद हुए मौके से एक व्यक्ति कमल सागर को गिरफ्तार किया गया जिसकी द्वारा पूछताछ में बताया गया कि इस फैक्ट्री का असली मालिक वसीम पुत्र मेहंदी हसन निवासी पत्थर खेड़ा थाना भोट जिला रामपुर है। और वह वसीम का मुंशी है जो यहां का काम देखता है।मौके पर आई अल्ट्राटेक सीमेंट के अधिकारी संजय शर्मा द्वारा फैक्ट्री का अवलोकन कर बताया कि जिन कट्टों में हमारी कंपनी अल्ट्राटेक का नाम अंकित है वह कट्टे डुप्लीकेट तरीके से छपवाए गए हैं।

 

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इन कट्टों में जो बैच नंबर व एमआरपी अंकित है वह स्पष्ट नहीं है और भिन्न है। जबकि असली सिमेंट कंपनी के जो कट्ठे होते हैं उनके बैच नंबर वह एमआरपी स्पष्ट पढ़ने में आते हैं। हमारी कंपनी के कहों में बैच नंबर व एमआरपी लेजर डॉटेड तरीके से कट्टों में अंकित कराया जाता है।

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