अल्मोड़ा: कपलेश्वर महादेव के प्रति अटूट आस्था; गांव-गांव से सभी ग्रामीणों की सहभागिता के साथ पहुंचती हैं भव्य जातुर,महादेव में सदियों पुरानी मान्यता और अटूट विश्वास

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अल्मोड़ा। ऐतिहासिक एवं पौराणिक सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के समीप स्थित प्रसिद्ध कपलेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां वर्ष भर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और मेलों का आयोजन होता रहता है।

🌸​कपलेश्वर महादेव: भक्ति और अटूट आस्था का धाम

​अल्मोड़ा जिले के सुंदर प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित कपलेश्वर महादेव मंदिर का अपना एक विशेष धार्मिक एवं पौराणिक महत्व है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। विशेषकर सावन के पवित्र महीने, महाशिवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहां भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।

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🌸​आस-पास के गांवों से पहुंचती हैं भव्य जात (जातुर)

​इस मंदिर की सबसे खूबसूरत परंपरा यहां आसपास के विभिन्न गांवों से आने वाली ‘जात’ (पारंपरिक धार्मिक शोभायात्रा/जातुर) है।

🌸​पारंपरिक देव डांगर और ढोल-दमाऊ: पास-पड़ोस के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी-अपनी पारंपरिक जातियों के साथ मंदिर पहुंचते हैं। स्थानीय वाद्ययंत्रों—🌸ढोल-दमाऊ और रणसिंगा—की थाप पर गाजे-बाजे के साथ जब जात मंदिर प्रांगण में प्रवेश करती है, तो पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और स्थानीय देवी-देवताओं के जयकारों से गुंजायमान हो उठता है।

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🌸​लोक संस्कृति और एकजुटता का प्रतीक: इन जातों में गांव के बुजुर्ग, युवा और महिलाएं अपने पारंपरिक परिधानों में शामिल होते हैं। यह जातुर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कुमाऊंनी लोक संस्कृति और ग्रामीण एकजुटता की एक जीवंत मिसाल पेश करती है।

🌸​स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है:

“कपलेश्वर महादेव हमारे क्षेत्र के रक्षक हैं। जब भी गांवों से जातुर (जात) मंदिर पहुंचती है, तो पूरे क्षेत्र में एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। अपनी परंपराओं को जीवित रखने के लिए ग्रामीण आज भी पुरानी निष्ठा के साथ इस परंपरा को निभा रहे हैं।”

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