तवांग में ICAR-VPKAS अल्मोड़ा का आयोजन: ‘वी.एल. मंडुआ 376’ और ‘विवेक मिलेट थ्रेशर’ बने किसानों की पहली पसंद

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तवांग में ICAR-VPKAS अल्मोड़ा का आयोजन: ‘वी.एल. मंडुआ 376’ और ‘विवेक मिलेट थ्रेशर’ बने किसानों की पहली पसंद

 

 

 

 

अल्मोड़ा/तवांग। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-VPKAS), अल्मोड़ा द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र तवांग (अरुणाचल प्रदेश) के सहयोग से तवांग जिले के विभिन्न गांवों में 17 से 26 अगस्त तक मंडुआ प्रक्षेत्र दिवस, किसान-वैज्ञानिक संवाद और ‘विवेक मिलेट थ्रेशर-कम-पर्लर’ के प्रदर्शन कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के मार्गदर्शन में उत्तर-पूर्वी पर्वतीय कार्यक्रम के तहत यह अभियान चलाया गया।

 

 

 

 

10 दिवसीय इस विस्तृत अभियान के दौरान किटपी, बघार, फोमेंग, ज़ेमिथांग, डोंगमारिंग, ब्लेटिंग, गोंखार, ग्यामतोंग, ग्रेनघर, खेत, बोमजा, बोंगलेन्ग और शेरबांग सहित दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। वैज्ञानिकों ने उन्नत मंडुआ उत्पादन तकनीकों, प्रजाति प्रदर्शन, बीज विनिमय, फसल प्रबंधन और कटाई-उपरांत प्रसंस्करण पर किसानों से सीधी चर्चा की।

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25-35 दिन पहले पकेगी फसल, श्रम की होगी बचत

प्रदर्शन के दौरान संस्थान द्वारा विकसित उन्नत किस्म ‘वी.एल. मंडुआ 376’ की क्षमता को रेखांकित किया गया। तवांग के खेतों में इस किस्म ने उत्कृष्ट वृद्धि, भरी हुई बालियों, मोटे दानों और बेहतर कल्ले फूटने के साथ शानदार परिणाम दिखाए। स्थानीय किस्मों की तुलना में यह 25 से 35 दिन पहले पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसानों के समय और श्रम दोनों की भारी बचत होगी।

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मिलेट थ्रेशर-कम-पर्लर ने खींचा ध्यान

कृषि में कठिन परिश्रम को कम करने के लिए संस्थान द्वारा विकसित ‘विवेक मिलेट थ्रेशर-कम-पर्लर’ का व्यावहारिक प्रदर्शन फोमेंग और ज़ेमिथांग-दुदुंघर में किया गया। पारंपरिक रूप से गहाई और मड़ाई में लगने वाली कड़ी मेहनत से निजात दिलाने वाली इस मशीन में कृषकों ने विशेष रुचि दिखाई।

 

 

 

 

 

संस्थान के वैज्ञानिकों डॉ. कामिनी बिष्ट, डॉ. सी. के. सिंह, डॉ. आर. पी. मीना और डॉ. एम. एस. भिंडा के समन्वय में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक पर्वतीय कृषि तकनीकों का प्रसार करना और किसानों की आय में सुधार लाना है।

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