Weather Update:पहाड़ों पर बर्फ का इंतजार: 22 से बदलेगा मौसम का मिजाज, उत्तरकाशी और चमोली में बर्फबारी की उम्मीद
उत्तराखंड में आज मौसम शुष्क रहने की संभावना है। 22 जनवरी से पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और 3000 मीटर व इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने के आसार हैं।
मौसम विभाग ने आगामी 25 जनवरी तक मौसम का मिजाज बदलने का पूर्वानुमान जारी किया है। उत्तराखंड में मौसम लगातार शुष्क बना हुआ है। चमोली जनपद में बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी हुई, लेकिन प्रदेशभर में शुष्क मौसम ने लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। बारिश न होने के कारण हवा की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। सोमवार को देहरादून सहित आसपास के क्षेत्रों में तेज धूप खिली रही। जिसके चलते दिन के समय गर्माहट का अहसास भी हुआ।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आज प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहेगा। 20 और 21 जनवरी को भी मौसम बदलने के कोई आसार नहीं है। हालांकि, 22 जनवरी से 25 जनवरी तक मौसम में बदलाव आने की संभावना है। 22 जनवरी से उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के कुछ स्थानों पर चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है, जबकि अन्य जनपदों में मौसम शुष्क बना रहेगा।
🌸बर्फबारी नहीं होने से ट्रैकिंग व्यवसाय प्रभावित
उत्तराखंड में अब तक बारिश और बर्फबारी नहीं होने के कारण पर्यटन व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। दिसंबर के महीने में जहां बर्फबारी से चमोली के औली और बेदनी बर्फ से ढक जाते थे तो वहीं इस साल अब तक बुग्याल और पहाड़ों की चोटियां सूनी पड़ी हुई है।
लोहाजंग में कई ट्रैकिंग कंपनियों का बेस कैंप है, लेकिन इन दिनों वहां भी सन्नाटा पसरा हुआ है। पिछले साल बर्फबारी के बाद यहां हर दिन लगभग 700 से 1000 पर्यटक आते थे, लेकिन इस बार 10 जनवरी तक केवल 296 पर्यटक आए हैं।
🌸मार्च में खिलने वाला बुरांश जनवरी में खिला
वहीं, पर्वतीय क्षेत्रों में खिलने वाले औषधीय गुणों की खान बुरांश भी बसंत से पहले ही खिल गया है। बुरांश, समुद्र तल से 1500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उगता है और मार्च के महीने में खिलता है, लेकिन इस बार जलवायु परिवर्तन के चलते बुरांश जनवरी मध्य से पहले ही खिल गया है, जिससे पारिस्थिकी तंत्र भी गड़बड़ा गया है।
पर्वतीय क्षेत्रों में बुरांश का फूल महिलाओं की आर्थिकी का जरिया होता है। बुरांश के फूलों से जूस और स्क्वैश बनाकर महिलाएं बाजार में बेचती है, लेकिन इस समय बुरांश खिलने से इसकी उत्पादन और गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है और कई लोगों का रोजगार भी प्रभावित हो सकता है।
