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शासन ने अन्य राज्यों के बच्चों को देहरादून के मदरसों में लाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। विशेष सचिव (अल्पसंख्यक) पराग मधुकर धकाते ने देहरादून के जिलाधिकारी को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

दरअसल, इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि अन्य राज्यों से बच्चों को उत्तराखंड लाकर देहरादून के मदरसों में रखा जा रहा है। शासन ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए तथ्यों की पुष्टि आवश्यक बताई है।

जारी निर्देशों में कहा गया है कि ऐसे सभी मामलों में बच्चों के आगमन के स्रोत की जांच की जाए और उनके अभिभावकों से सहमति पत्र की पुष्टि की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन व्यक्तियों की ओर से बच्चों को प्रदेश में लाया गया और उन्हें मदरसों में दाखिल कराया गया।

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शासन ने देहरादून सहित हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों के जिलाधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि अपने-अपने जनपदों में संचालित सभी मदरसों का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जाए।

जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेष सचिव ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए एवं जांच रिपोर्ट शीघ्र शासन को उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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🌸मदरसा बोर्ड को धामी सरकार कर चुकी समाप्त

धामी सरकार के निर्णय के अनुसार एक जुलाई, 2026 से राज्य मदरसा बोर्ड समाप्त हो जाएगा। इसकी जगह नया उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित किया गया है।

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को आधुनिक, मुख्यधारा की शिक्षा और एक समान पाठ्यक्रम के तहत लाना है। यह कदम मदरसों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बनाने के लिए उठाया गया है।

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