Uttrakhand News :जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग की मुलाक़ात,फिर शुरू होगी 5 साल से बंद कैलाश मानसरोवर यात्रा

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ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की. इस बातचीत में कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और भारत-चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट शुरू करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. पिछले पांच वर्षों से बंद कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि फिर से शुरु हो सकती है.

जी-20 शिखर सम्मेलन में हुई बातचीत के बाद भारत-चीन के बीच यात्रा शुरू होने की संभावनाएं बढ़ी हैं. हालांकि, यात्रा पर चीन की सख्त शर्तों और दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के कारण स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. अगर यात्रा शुरू होती है, तो यह भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए राहत की बात होगी.

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🌸क्या है कैलाश मानसरोवर यात्रा?

कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा है. यह यात्रा तिब्बत के कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की ओर जाती है. कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास और मानसरोवर झील को भगवान ब्रह्मा की रचना माना जाता है. यह झील तिब्बत के उच्च पठार पर स्थित है और इसकी ऊंचाई लगभग 4,590 मीटर है. समुद्र तल से 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह यात्रा कठिन और चुनौतीपूर्ण होती है. यात्रा के दौरान तीर्थयात्री कैलाश पर्वत की परिक्रमा करते हैं और मानसरोवर झील में स्नान करते हैं.

🌸तीन रास्तों से होती है यात्रा

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालु तीन रास्तों का प्रयोग करते है .जिसमें पहला रास्ता लिपुलेख दर्रा मार्ग है जिसमें श्रद्धालु उत्तराखंड से होकर तिब्बत में प्रवेश करते हैं. दुसरा नाथू ला दर्रा मार्ग है जिसमें श्राद्धालु सिक्किम होते हुए तिब्बत तक जाते हैं और तीसरा मार्ग शिगात्से मार्ग है इस रास्ता का प्रयोग करके यात्री तिब्बत से मानसरोवर तक जाते हैं.

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🌸उत्तराखंड से तिब्बत तक है

🌸कैलाश मानसरोवर का चीन कनेक्शन

कैलाश मानसरोवर यात्रा तिब्बत क्षेत्र में स्थित है, जो चीन के प्रशासनिक नियंत्रण में है. तीर्थयात्रियों को यात्रा के लिए चीनी सरकार से वीजा और अनुमति प्राप्त करनी होती है. चीन द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन अनिवार्य है, जिसमें यात्रियों की संख्या, यात्रा की अवधि और मार्ग तय किए जाते हैं.

तिब्बत में चीन के राजनीतिक और प्रशासनिक नियंत्रण के कारण यात्रा में परेशानियां बढ़ी है. इसके साथ ही पर्यावरणीय और सुरक्षा कारणों से चीन ने यात्रा के लिए सख्त नियम लागू किए हैं.

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