Uttrakhand News :समान नागरिक संहिता पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान समिति 2 फरवरी को सरकार को सौंपेगी ड्राफ्ट रिपोर्ट

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उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए जस्टिस (सेनि) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति ने ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खुलासा किया कि समिति दो फरवरी को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इसका आकलन कराकर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में लाएंगे और फिर विधानसभा सत्र में बिल लाया जाएगा। बता दें कि प्रदेश में पांच फरवरी से विधानसभा का सत्र आहूत कर दिया गया है। सत्र की अधिसूचना भी जारी हो गई है। इस सत्र में यूसीसी बिल लाए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही 25 जनवरी को विशेषज्ञ समिति का कार्यकाल 15 दिन के लिए बढ़ा दिया गया था। तभी यह संभावना जताई जा रही थी कि समिति जल्द रिपोर्ट सौंप देगी। इस बीच सीएम ने कहा, 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में यूसीसी लागू करना हमारी सरकार का संकल्प था। देवभूमि की जनता के सामने हमने अपना यह संकल्प रखा था।

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कहा, उस संकल्प को पूरा करने के लिए जनता ने हमें सरकार बनाने का आशीर्वाद दिया। हमने ड्राफ्ट बनाने के लिए कमेटी का गठन किया। कमेटी ने अपना काम पूरा कर लिया है। कमेटी की ओर से हमें बताया गया कि दो फरवरी को वह अपना ड्राफ्ट दे देगी। आकलन कराने के बाद विधानसभा में विधेयक लाने की दिशा में हम आगे बढ़ेंगे।

सोमवार को मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी यूसीसी की रिपोर्ट के संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत, श्रेष्ठ भारत के विजन और चुनाव से पूर्व उत्तराखंड की देव तुल्य जनता के समक्ष रखे गए संकल्प एवं उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप हमारी सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है।

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कहा, यूनिफार्म सिविल कोड का मसौदा तैयार करने के लिए बनी कमेटी दो फरवरी को ड्राफ्ट प्रदेश सरकार को सौंपेगी। कहा, हम आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाकर प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करेंगे।

💠यूसीसी रिपोर्ट में इन बातों के शामिल होने की चर्चा

महिलाओं के लिए विवाह की आयु बढ़ाकर 21 वर्ष, विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा, शादी का पंजीकरण नहीं कराने वाले को सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा, लिव-इन रिलेशनशिप फैसले के बारे में अपने माता-पिता को सूचित करना होगा, हलाला और इद्दत की प्रथा बंद होगी, बहुविवाह (एक से अधिक पत्नियां रखने की प्रथा) भी गैरकानूनी होगा, पति-पत्नी को तलाक लेने का समान हक दिया जाएगा।

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