Uttarakhand News:देवभूमि उत्तराखंड की मानसी घनसाला एयर फोर्स में बनी सबसे कम उम्र की महिला फाइटर पायलट

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उत्तराखंड के बेटे ही नहीं बेटियां भी देशसेवा की राह में लगातार आगे बढ़ रही हैं। मेहनती बेटियां सेना में अफसर बनकर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। भारत माता की रक्षा के लिए अनेकों योद्धाओं ने अपना सर्वोच्च न्योछावर किया है। और इतिहास गवाह है कि जब-जब महान योद्धाओं का नाम लिया जाता है तब-तब झांसी की रानी, अहिल्याबाई होल्कर, ज्योतिबा फुले जैसे नामों को भी स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है।

🔹सबसे कम आयु की फाइटर पायलट

और अब इनमें एक और नाम जुड़ने को तैयार है और वो है उत्तराखंड की बेटी मानसी घंसला का। जिन्होंने भारतीय वायु सेना में सबसे कम आयु की फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच दिया है। केवल 22 वर्षीय मानसी की इस अभूतपूर्व उपलब्धि से उत्तराखंड का मान बढ़ा है।

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लेकिन दुश्मन देशों के साथ कई अन्य देश इस बात से हैरान भी हैं। उत्तराखंड कोटद्वार की बेटी ने अपनी इस उपलब्धि से भारत को गरीब देश मानने वाले सभी देशों के मुँह पर ताला लगा दिया है। और यह साबित किया है कि जब बेटियां उड़ान भरती हैं तो आसमान भी बौना नज़र आता है।

जाने मानसी के बारे मे 

मानसी घनसाला का परिवार कोटद्वार के बालासौड़ में रहता है। बचपन से ही पढ़ाई और खेल में अव्वल रही मानसी का जीवन अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चूका है। मानसी के पिता श्रेष्ठमणि घनसाला और माता करुणा देवी घनसाला अपनी बेटी की इस उपलब्धि से फूले नहीं समा रहे। जहाँ युद्ध क्षेत्रों में ज़्यादातर बेटों से आस लगाई जाती है। वहीं देवभूमि उत्तराखंड की बेटी ने अपनी अथक मेहनत और लगन से भारत माँ की सेवा करने का निर्णय लिया है। और इस निर्णय के लिए इस प्रकार प्रयास किया कि इसकी बराबरी करना दशकों बाद भी मुश्किल होगा।

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🔹उत्तराखंड की बेटियों के लिए गर्व की बात

अपने माता पिता से मिले समर्थन और भारतीय सेना की वीर गाथाओं से प्रेरणा प्राप्त मानसी ने बचपन से ही राष्ट्र सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया था। अपने सपने को पूरा करने के लिए मानसी ने कड़ी मेहनत की और AFCAT की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की। इसके बाद एयरफोर्स अकादमी से डेढ़ साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद देश को मानसी के रूप में वायु सेना की सबसे कम उम्र की फाइटर पायलट मिली। जो हमारे उत्तराखंड और उत्तराखंड की बेटियों के लिए गर्व की बात है।

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