खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति किया जागरूक
‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति किया जागरूक
विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया मृदा संरक्षण का प्रभावी संदेश
अल्मोड़ा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के निर्देशन में विकासखंड हवालबाग के पाखुड़ा गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग रहा। इस आयोजन में गांव के कुल 27 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें 20 महिला किसान और 7 पुरुष किसान शामिल थे। कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. बी.एम. पांडेय, डॉ. जे.पी. आदित्य एवं डॉ. कामिनी बिष्ट द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जे.पी. आदित्य ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और टिकाऊ कृषि उत्पादन के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य की सुरक्षा को अनिवार्य बताया। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे केवल मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें। संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से न केवल रासायनिक उर्वरकों की अनावश्यक खपत घटती है, बल्कि मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनी रहती है और पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता में वृद्धि होती है।
कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (आरएडब्ल्यूई) के विद्यार्थियों ने मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन पर एक जीवंत नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने, फसलों में उर्वरकों की सही खुराक एवं समयबद्ध प्रयोग तथा विवेकपूर्ण कृषि निवेश का संदेश दिया गया।
किसानों ने साझा कीं अपनी प्रमुख समस्याएं कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवाद सत्र में किसानों ने पर्वतीय कृषि से जुड़ी अपनी व्यावहारिक समस्याओं को वैज्ञानिकों के समक्ष रखा। किसानों ने सिंचाई जल की कमी, मृदा परीक्षण के फायदों की जानकारी न होना, जंगली जानवरों से फसलों की तबाही, पलायन तथा समय पर कृषि निवेश और सही तकनीकी जानकारी न मिल पाने जैसी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।
समाधान और सुझाव किसानों ने अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए खेतों पर आधारित प्रत्यक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रमों, बेहतर फसल एवं पादप सुरक्षा उपायों, कृषि निवेशों की समयबद्ध आपूर्ति तथा पर्वतीय क्षेत्रों के अनुकूल हल्की एवं आसानी से संचालित होने वाली कृषि मशीनों की उपलब्धता पर जोर दिया।
संस्थान का यह प्रयास पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तकनीकी सहयोग और किसानों की क्षमता वृद्धि करके पर्वतीय कृषि को अधिक लाभकारी, व्यावहारिक एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
