प्रदेश कांग्रेस वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिट्टू ने कांग्रेसजनों संग किये भारतरत्न डा० अम्बेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित

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*प्रदेश कांग्रेस वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिट्टू ने कांग्रेसजनों संग किये भारतरत्न डा० अम्बेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित*
अल्मोड़ा-आज संविधान निर्माता भारतरत्न डा० भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि पर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस प्रदेश इलेक्शन कैम्पेन कमेटी के चैयरमेन बिट्टू कर्नाटक ने कांग्रेसजनों के साथ उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये।इस अवसर पर बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जिन्हें हम सब डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम से भी जानते हैं

आज उनका परिनिर्वाण दिवस है।डॉक्टर अम्बेडकर को संविधान का जनक कहा जाता है। 6 दिसंबर 1956 को उनकी मृत्यु हुई थी।हर साल 6 दिसंबर के दिन को बाबा साहेब की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।उन्होंने कहा कि डाक्टर अम्बेडकर ने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था।श्रमिकों,किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था।वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मंत्री,भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे।

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उन्होंने समता,समानता, बन्धुता एवं मानवता आधारित भारतीय संविधान को 02 साल 11 महीने और 17 दिन में तैयार करने का अहम कार्य किया।साल 1951 में महिला सशक्तिकरण का हिन्दू संहिता विधेयक पारित करवाने में प्रयास किया और पारित न होने पर स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।निर्वाचन आयोग, योजना आयोग,वित्त आयोग,महिला पुरुष के लिये समान नागरिक हिन्दू संहिता,राज्य पुनर्गठन,राज्य के नीति निर्देशक तत्व,मौलिक अधिकार, मानवाधिकार,निर्वाचन आयुक्त और सामाजिक,आर्थिक,शैक्षणिक एवं विदेश नीति बनाई।उन्होंने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में एसी-एसटी के लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की।

मानवाधिकार जैसे दलितों एवं दलित आदिवासियों के मंदिर प्रवेश,पानी पीने,छुआछूत,जातिपाति,ऊंच-नीच जैसी सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए कार्य किए।उन्होंने मनुस्मृति दहन,महाड सत्याग्रह,नाशिक सत्याग्रह,येवला की गर्जना जैसे आंदोलन चलाएं।बेजुबान,शोषित और अशिक्षित लोगों को जागरुक करने के लिए साल 1927 से 1956 के दौरान मूक नायक,बहिष्कृत भारत,समता, जनता और प्रबुद्ध भारत नामक पांच साप्ताहिक और पाक्षिक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया।

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उन्होंने छात्रावास,नाइट स्कूल, ग्रंथालयों और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से कमजोर वर्गों के छात्रों को अध्ययन करने और साथ ही आय अर्जित करने के लिए उनको सक्षम बनाया।सन् 1945 में उन्होंने अपनी पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी के जरिए मुम्बई में सिद्वार्थ महाविद्यालय तथा औरंगाबाद में मिलिन्द महाविद्यालय की स्थापना की।कार्यक्रम में भूपेन भोज (भुप्पी),दीपक पोखरिया, गौरव अवस्थी,सुमित बिष्ट,कैलाश चौहान,राजेंद्र प्रसाद,रोहित शैली,हेम जोशी,प्रकाश सिंह मेहता,विनोद कांडपाल,रश्मि कांडपाल,उमेश रैकवार सहित दर्जनों कांग्रेजन उपस्थित रहे।

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