अपनी विशिष्ट परंपरा, अनुशासन और सात्विकता के लिए क्षेत्र में प्रसिद्ध है ‘रामलीला कमेटी धौलछीना’

 

अपनी विशिष्ट परंपरा, अनुशासन और सात्विकता के लिए क्षेत्र में प्रसिद्ध है ‘रामलीला कमेटी धौलछीना’

 

 

 

विशेष रिपोर्ट | अखबार ब्यूरो धौलछीना (अल्मोड़ा): आधुनिकता के इस दौर में जहाँ कई जगहों पर रामलीला मंचन के तौर-तरीके बदल रहे हैं, वहीं धौलछीना क्षेत्र की यह ऐतिहासिक रामलीला अपनी अनुशासनबद्ध परंपरा, सात्विकता और विशिष्ट शैली के लिए संपूर्ण क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। आश्विन (अशोज) के महीने में जब ग्रामीण और किसान खेती-किसानी के काम-धंधों से फुर्सत पाते हैं, तब इस पारंपरिक रामलीला का आयोजन पूरे सांस्कृतिक उल्लास के साथ किया जाता है।

 

 

 

13 वर्षों की निरंतरता और स्वर्णिम इतिहास

इस रामलीला का आयोजन पिछले 13 वर्षों से लगातार सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इससे पूर्व यहाँ 14 वर्षों तक इसका मंचन होता रहा था, जिसके बाद बीच में यह कुछ समय के लिए स्थगित हो गया था।

 

 

 

बुजुर्गों की मानें तो बरसों पहले जब क्षेत्र में बिजली और साउंड सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएँ नहीं थीं, तब ग्रामीण मशाल जलाकर रामलीला का मंचन करवाते थे। उस दौर में पल्लू गाँव के पांडे परिवार के लोग इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेते थे और उन्हीं के कुशल दिशा-निर्देशन में संचालन होता था। यद्यपि समय के साथ पलायन के कारण वे लोग गाँव से बाहर चले गए, लेकिन उनके द्वारा रोपी गई यह सांस्कृतिक नींव आज भी क्षेत्र में पूरी मजबूती के साथ कायम है।

यह भी पढ़ें 👉  जय गोल्ज्यू महोत्सव–2026: लोक संस्कृति और संगीत के अद्भुत संगम के साथ सांस्कृतिक संध्या संपन्न

 

 

 

 

अनूठी शैली: महिला कलाकारों का अभिनय और शत-प्रतिशत कंठस्थ संवाद

धौलछीना की इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मंचन शैली है:

महिला कलाकारों की सशक्त भागीदारी: मंच पर महिला कलाकार स्वयं उतरकर विभिन्न भूमिकाओं का सजीव और भावपूर्ण अभिनय प्रस्तुत करती हैं।

बिना डायरी के सधा हुआ अभिनय: मंचन के दौरान किसी भी पात्र को हाथ में डायरी या स्क्रिप्ट रखने की अनुमति नहीं होती। सभी कलाकार अपने संवाद पूरी तरह कंठस्थ करके मंच पर उतरते हैं, जो उनकी कला के प्रति अगाध निष्ठा को दर्शाता है।

 

 

 

विशाल इनडोर मंचन और अभूतपूर्व सात्विकता

यह रामलीला पूरी तरह से ‘इनडोर’ (सभागार के अंदर) आयोजित की जाती है, जहाँ एक साथ 2,000 से 4,000 दर्शकों के बैठने की विशाल और उत्तम व्यवस्था रहती है।

मंचन के दौरान पवित्रता, शुद्धता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है। समिति से जुड़े सभी लोग पूरी तरह सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

यह भी पढ़ें 👉  अल्मोड़ा: अलेक्जेंडर गेट से कोतवाली तक सड़क मरम्मत शुरू, पार्षद वैभव पांडे के प्रयासों को मिली सफलता

 

 

 

 

आयोजन समिति का सराहनीय प्रयास

रामलीला कमेटी धौलछीना के व्यवस्थापक दरवान सिंह रावत, अध्यक्ष चंद्र सिंह मेहरा, डायरेक्टर उमेद मनराल, उपाध्यक्ष नंदन सिंह, दीवान सिंह बिष्ट व ललित मेहरा, मीडिया प्रभारी प्रशांत रावत, कोषाध्यक्ष अनिल जोशी, फोटोग्राफर राजू बोरा सहित समस्त समिति सदस्यों, पदाधिकारियों और कलाकारों के सक्रिय सहयोग से यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयाँ दे रहा है।

 

 

 

 

मंच के मुख्य पात्र एवं कलाकार

सूत्रधार: सुशांत रावत

नारद: कुंदन सिंह मेहरा

पार्वती: कंचन सुगण

रावण: उमेद सिंह मनराल

रावण मंत्री: सूरज मेहरा / कुंदन मेहरा

कुम्भकर्ण: नन्दन सिंह मनराल

विभीषण: राकेश मेहरा

दशरथ: चिरंजीव लाल वर्मा

जनक: प्रशान्त रावत

कौशल्या: कंचन सुगण

कैकई: काजल बोरा

सुमित्रा: निकिता परिहार

नदी: काजल

मुनिगण: नन्दन, ललित, हरीश, रितेश

देवगण: ललित, विपिन, प्रशान्त, ओमिल, गोपाल, अमोल

 

बाल रूप कलाकार:

बाल राम: ईशिता मेहरा

बाल सीता: कु० अनन्या मेहरा

बाल लक्ष्मण: शुभम् बिष्ट

बाल भरत: प्रियांशु जोशी

बाल शत्रुघ्न: सात्विक मेहरा

Advertisement