दिव्यशक्ति: रामनगर की गिरिजा देवी की महिमा है अपार जो मांगो सच्चे मन से पूरी होती है मुराद आइये जानें

0
ख़बर शेयर करें -

मां गिरिजा देवी मन्दिर

देवभूमि उत्तराखण्ड की सुंदर वादियों में है मां गिरिजा देवी का पावन धाम. रामनगर केसुंदरखाल गांव में स्थित है देवी का यह दिव्य मंदिर, जो कि एक बेहद छोटे से टीले पर बना हुआ है. माता का यह मंदिर कार्बेट नेशनल पार्क से महज 10 किमी की दूर पर है. हरे-भरे जंगलों में कोसी नदी के बीचों-बीच बने माता पार्वती के इस मंदिर को स्थानीय लोग गर्जिया माता के मंदिर के रूप में जानते हैं. माता के दर्शन के लिए भक्तों को माता के दरबार में पहुंचने के लिए 90 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. चूंकि यह बहुत ही छोटी सी पहाड़ी पर बना हुआ है, इसलिए सीधी चढ़ाई वाली इन सीढ़ियों में एक बार में एक ही भक्‍त ऊपर चढ़ पाता है.कभी शेर करते थे मंदिर की परिक्रमा
गिरिराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी पार्वती को गिरिजा भी कहा जाता है. इस ​तरह देखें तो गर्जिया माता गिरिजा का ही अपभंश है. हालांकि हरे-भरे जंगलों के बीच इस मंदिर के बारे में लोगों का यह भी मानना है कि कभी यहां पर शेर आकर माता के मंदिर की परिक्रमा और गर्जना किया करते ​थे. उसी समय से लोग इसे गर्जिया माता के मंदिर के नाम से बुलाने लगे.  भगवान भैरव के निवेदन पर रुकी थीं भगवती
माता गिरिजा का यह मंदिर चमत्कारों से भरा हुआ है. मान्यता है कि माता का यह मंदिर जिस टीले पर बना हुआ है, वह कभी किसी पर्वत खंड से अलग होकर बहते हुए यहां आया था. मंदिर को टीले के साथ बहता देख भगवान भैरव ने उसे रोकने के लिए “थिरौ, बैणा थि रौ” अर्थात् ‘ठहरो, बहन ठहरो’ बोला था. मान्यता है कि भगवान भैरव के निवेदन को स्वीकार कर माता उनके साथ तब से यहीं पर निवास कर रही हैं. मान्यता है कि माता की पावन प्रतिमा यहां पर हुई खुदाई के दौरान मिली थी. माता के इस पावन धाम के ठीक नीचे भगवान भैरव का मंदिर भी बना हुआ है. मान्यता है कि भगवान भैरव के दर्शन करने के बाद ही माता की साधना पूरी होती है. भगवान भैरों को यहां पर विशेष रूप से खिचड़ी प्रसाद चढ़ता है.

मनोज पांडेय (पुजारी)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *