Almora News:उच्च जिंक एवं गुणवत्तायुक्त प्रोटीन वाली जैव सुदृढ़ीकृत मक्का की देश में प्रथम किस्म ‘वी एल सुपोषिता’ अधिसूचित

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भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा विकसित उच्च जिंक एवं गुणवत्ता युक्त प्रोटीन वाली जैव-सुदृढ़ीकृत मक्का की नई संकर किस्म ‘वी एल सुपोषिता’ उत्तर पर्वतीय क्षेत्रों हेतु अधिसूचित की गयी है। वी एल सुपोषिता उच्च जिंक एवं क्यू पी एम के संयोजन वाली देश की पहली किस्म है। यह जल्दी पकने वाली (90–95 दिन) संकर किस्म है, जिसमें ट्रिप्टोफान 0.082 प्रतिशत, लाइसिन 0.357 प्रतिशत और जिंक की मात्रा 37.17 पी पी एम है। उच्च जिंक युक्त होने के कारण यह प्रजाति शरीर में जिंक की कमी को दूर करने में सहायक होगी तथा इसमें आवश्यक अमीनो अम्ल लाइसिन और ट्रिप्टोफैन अधिक मात्रा में होने के कारण इसका प्रोटीन सामान्य मक्का की तुलना में अधिक गुणवत्तापूर्ण है। उत्तर पर्वतीय क्षेत्र में अखिल भारतीय समन्वित परीक्षणों में इसका औसत उत्पादन 6,819 किग्रा/है. था व इसने टर्किकम पर्ण झुलसा रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधिता प्रदर्शित की। यह प्रजाति पूरे उत्तर पर्वतीय क्षेत्र (लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड (पर्वतीय), असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) में खेती के लिए अधिसूचित की गयी है।

यह प्रजाति किसानों की उच्च उपज, पोषण-संपन्न और रोग प्रतिरोधी मक्का किस्म तक पहुँच सुनिश्चित करने में सहायक होगी। इससे पर्वतीय और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और आय सृजन को बढ़ावा मिलेगा।

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“उच्च उपज, उच्च पोषण—किसानों की नई ताकत ‘वी एल सुपोषित’ मक्का”
भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा विकसित एवं गुणवत्तायुक्त प्रोटीन वाली उच्च जिंक जैव-सुदृढ़ीकृत मक्का की नई संकर किस्म ‘वी एल सुपोषिता’ अधिसूचित की गयी है।
🌸मुख्य विशेषताएं:
• उच्च जिंक एवं क्यू पी एम के संयोजन वाली देश की पहली किस्म
• औसत उत्पादन: 6,700-6,800 किग्रा/है
• जल्दी पकने वाली (90–95 दिन)
• मध्यम प्रतिरोधिता: टर्किकम पर्ण झुलसा रोग
• पोषण से भरपूर: ट्रिप्टोफान, लाइसिन और जिंक
• पूरे उत्तर पर्वतीय क्षेत्र (लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड (पर्वतीय), असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) में खेती के लिए उपयुक्त

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यह नई किस्म किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर पोषण और स्थायी कृषि प्रथाओं की दिशा में मदद करेगी। अब किसान अपने परिवार और क्षेत्र के लिए उच्च पोषण और आय सुनिश्चित कर सकते हैं।

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