Almora News:भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में ‘हिन्दी भाषा की वैज्ञानिकता’ पर कार्यशाला का आयोजन

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आज दिनांक 25 मार्च, 2026 को भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार और इसकी तकनीकी सक्षमता को रेखांकित करने के उद्देश्य से ‘हिन्दी भाषा की वैज्ञानिकता’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त की अध्यक्षता में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम तदुपरान्त‍ परिषद गीत से हुआ जिसने कार्यशाला के माहौल को गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम के शुभारंभ में संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कामिनी बिष्ट ने संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त तथा कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. रमेश सिंह पाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं लेखक सहित सभी विभागाध्यक्षों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों और प्रतिभागियों की गरिमामयी उपस्थिति के लिए उनका हार्दिक स्वागत व अभिनंदन किया।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. रमेश सिंह पाल ने अपने व्याख्यान में हिन्दी की वैज्ञानिकता और उसकी ध्वन्यात्मक शुद्धता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे आधुनिक विज्ञान के अनुकूल बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दी की देवनागरी लिपि विश्व की सबसे तर्कसंगत लिपियों में से एक है, क्योंकि इसमें प्रत्येक ध्वनि के लिए एक विशिष्ट चिह्न निर्धारित है। उन्होंने विस्तार से समझाया कि हिन्दी में ‘जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा जाता है’, जो इसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, डेटा प्रोसेसिंग और आधुनिक तकनीक के लिए अत्यंत सटीक बनाता है। इसकी वर्णमाला का वर्गीकरण (कंठ्य, तालव्य, मूर्धन्य आदि) पूर्णतः मानव उच्चारण तंत्र के विज्ञान पर आधारित है, जो अन्य विदेशी भाषाओं में दुर्लभ है क्योंकि हिन्दी भाषा में एक उच्चारण के लिए एक ही वर्ण तथा एक ही वर्ण के लिए एक उच्चारण होता है। उन्होंने कहा कि हिन्दी ही एक ऐसी भाषा है जिसमें भाव के अनुसार शब्दों को बदलने की क्षमता निहित है।

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इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में हिन्दी का उपयोग न केवल भाषाई गौरव का प्रतीक है, बल्कि यह जटिल सूचनाओं के संचार को अधिक स्पष्ट और त्रुटिहीन बनाता है। उन्होंने संस्थान के समस्त वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों से विशेष आह्वान किया कि वे अपने दैनिक कार्यालयी एवं आधिकारिक कार्यों में अधिक से अधिक हिन्दी का उपयोग करें ताकि हमारा संस्थान संसदीय राजभाषा समिति के सभी मानकों को पूर्ण करने में सक्षम हो। उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक सम्भव हो अपना नाम एवं हस्ताक्षर हिन्दी में ही करने का प्रयास करें क्योंकि मातृभाषा पर गर्व करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हिन्दी हमारी सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ आधिकारिक पत्राचार और आधुनिक शोध परिणामों को जन-सामान्य तक पहुँचाने के लिए एक अत्यंत सक्षम और तार्किक भाषा है।

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इस अवसर पर संस्थान के सभी विभागाध्यक्ष, अनुभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, अधिकारी, तकनीकी, प्रशासनिक एवं सहायक वर्ग के कार्मिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन मुख्य तकनीकी अधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी राजभाषा श्रीमती रेनू सनवाल ने कुशलतापूर्वक किया। अन्त में संस्थान राजभाषा समिति की सदस्या एवं वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका खाती ने आभार ज्ञापित करते हुए सभी के योगदान और सहभागिता के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। कार्यशाला का समापन अपनी मातृभूमि तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति सम्मान व्‍यक्‍त करते हुए राष्ट्रगान से किया गया।

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