Almora News :जिले के अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं,इलाज के लिए भटक रहे हैं परिजन

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अल्मोड़ा। जिले के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी आम मरीजों के साथ ही बच्चों पर भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों की कमी से जिले के अस्पतालों में बच्चों को इलाज नहीं मिल रहा है और परिजन भटक रहे हैं।

जिले में संचालित नौ में से सात सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में परिजनों को बीमार बच्चों के इलाज के लिए 80 से 100 किमी की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिले के 11 विकासखंडों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर नौ सीएचसी संचालित हैं। देवालय, देघाट, जैंती, शलंगी, द्वाराहाट, चौखुटिया, भिकियासैंण, धौलादेवी सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत हैं। सल्ट और पीपीपी मोड पर संचालित होने वाले भिकियासैंण सीएचसी में ही स्वास्थ्य विभाग बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती कर सका है और अन्य सीएचसी में बच्चों के उपचार के लिए चिकित्सक तैनात नहीं हैं। हर रोज इन अस्पतालों में डायरिया, पीलिया, वायरल सहित अन्य बीमारी से ग्रसित 150 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है और अभिभावक बच्चों को लेकर भटकने के लिए मजबूर हैं। मजबूरन अभिभावकों को अपने बच्चों के इलाज के लिए रानीखेत उप जिला चिकित्सालय, जिला, महिला या बेस अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है। संवाद

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💠सोमेश्वर उप जिला चिकित्सालय में भी तैनात नहीं हैं बाल रोग विशेषज्ञ

अल्मोड़ा। सोमेश्वर में उप जिला चिकित्सालय संचालित है। कैबिनेट मंत्री के गृह क्षेत्र के इस अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है जबकि यहां जिला, महिला, रानीखेत उप जिला चिकित्सालय के बाद सबसे अधिक मरीजों का दबाव रहता है।

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💠विशेषज्ञों के पीजी के लिए जाने से बढ़ी दिक्कत 

अल्मोड़ा। जिले के अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञों के पीजी के लिए जाने से दिक्कत बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक वर्तमान में 39 चिकित्सक पीजी के लिए गए हैं। इनमें विशेषज्ञ भी शामिल हैं। ऐसे में अस्पताल विशेषज्ञों की कमी का सामना कर रहे हैं। इससे मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

सीएमओ, अल्मोड़ा, डॉ आरसी पंत ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। विशेषज्ञों के रिक्त पदों की जानकारी निदेशालय को दी गई है। शासन स्तर पर ही इनकी नियुक्ति संभव है। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लगातार प्रयास हो रहे हैं।

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