Almora News:मोबाइल फोन के लत से कमजोर हो रही बच्चों की नजर,इन समस्याओं से ग्रस्त रोजाना 15 से 20 बच्चे पहुंच रहे अस्पताल

ख़बर शेयर करें -

मोबाइल की लत किशोरों, युवाओं, बच्चों हर वर्ग के लिए हानिकारक हो सकती है। केवल सीमित समय में ही मोबाइल का उपयोग करने से मोबाइल से होने वाली बीमारियों का शिकार होने से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह लत बच्चों व किशोरों को मानसिक रूप से भी कमजोर करती है।

🔹इन परेशानी से झूस रहे बच्चे 

मोबाइल और टीवी पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों की आंखों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। बच्चे आंखों में दर्द, धुंधला दिखाई देने और सिर सर्द जैसी समस्याओं से जूझने लगे हैं। इससे चिकित्सक भी चिंतित हैं।जिला अस्पताल में रोजाना इन समस्याओं से ग्रस्त 15 से 20 बच्चे पहुंच रहे हैं। नजर कमजोर होने पर इन्हें चश्मा लगाने की नौबत आ रही है। 

यह भी पढ़ें 👉  Uttrakhand News :उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा एक्शन,वन विभाग के बाद अब परिवहन विभाग के चार कर्मचारीयो को किया निलंबित

🔹बच्चों की संख्या में इजाफा चिंता का विषय 

कोराना काल में शुरू हुआ ऑनलाइन पढ़ाई का ट्रेंड अब भी जारी है। ऐसे में विद्यार्थियों का अधिकांश समय मोबाइल या टीवी के सामने बीत रहा है, इसका सीधा असर उनकी नजर पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन मकवाल के मुताबिक यहां ओपीडी में आने वाले मरीजों के सापेक्ष 15 से 20 प्रतिशत बच्चे आंखों की समस्या से ग्रस्त आ रहे हैं। बच्चों की आंखों में दर्द, सिर दर्द, धुंधला दिखाई देने की शिकायत मिल रही है। इस समस्या से ग्रसित बच्चों की संख्या में इजाफा चिंता का विषय है। 

यह भी पढ़ें 👉  Uttrakhand News :उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुंबई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सम्मान समारोह में हुए शामिल

🔹यह बरतें सावधानी 

🔹पढ़ाई या अन्य काम करते समय लगातार मोबाइल स्क्रीन पर नजरें नहीं टिकानी चाहिए। हर 30 मिनट बाद नजरों को स्क्रीन से हटाकर पलकों को बार-बार झपकाना जरूरी है। 

स्क्रीन 15-20 डिग्री पर रखें, दूरी भी जरूरी 

🔹आंखों के लेवल के अनुसार स्क्रीन को 15 से 20 डिग्री के एंगल पर रखना चाहिए। आंखों से स्क्रीन की दूरी 25 सेंटीमीटर से अधिक होनी चाहिए। 

🔹मोबाइल और टीवी लगातार देखने से बच्चों में आंखों की समस्या पैदा हो रही है। बच्चों को इनके दुष्प्रभाव बताना जरूरी है। अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चे को किसी तरह की समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह अवश्य लें-जीवन मकवाल, नेत्ररोग सर्जन, जिला अस्पताल, अल्मोड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *