नैनीताल पेयजल संकट: दूषित पानी से मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, DM और CMO समेत कई बड़े अफसर आज कोर्ट में तलब
नैनीताल पेयजल संकट: दूषित पानी से मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, DM और CMO समेत कई बड़े अफसर आज कोर्ट में तलब
अल्मोड़ा/नैनीताल। नैनीताल-दिल्ली मार्ग पर स्थित ज्योलीकोट और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दूषित पेयजल के सेवन से फैली बीमारियों और हुई मौतों पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जनस्वास्थ्य और नागरिकों के जीवन पर मंडराते खतरे को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने नैनीताल के जिलाधिकारी (DM), मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO), उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबंधक तथा उत्तराखंड पेयजल निगम (कुमाऊँ मंडल) के मुख्य अभियंता को 8 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
यह सख्त रुख बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए बताया गया कि ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल जैसे गांवों में पिछले तीन महीनों से डायरिया और पीलिया का भयंकर प्रकोप है। दूषित पानी के कारण अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। याचिका में विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रभावितों के मुफ्त इलाज और तुरंत स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की गई है।
मामले की भयावहता को देखते हुए खंडपीठ ने सभी संबंधित प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जल जनित बीमारियों पर रोकथाम, प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ जल वितरण और समस्या के स्थायी समाधान का पूरा रोडमैप (कार्ययोजना) लेकर कोर्ट में उपस्थित हों। साथ ही, अदालत ने उत्तराखंड जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को तत्काल प्रभाव से सभी प्रभावित गांवों में स्वच्छ एवं संदूषण-मुक्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का हुक्म जारी किया है।
अदालत के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और अब हर किसी की नज़रें कोर्ट की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।