Almora News:पर्वतीय खेती होगी आसान: अल्मोड़ा के गांवों में विवेक मंडुवा और धान थ्रेशर की आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

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कृषकों के लिए वरदान: मंडुवा और धान थ्रेशर की आधुनिक तकनीक का सफल प्रदर्शन

पर्वतीय कृषि में श्रम की लागत को कम करने और फसलों की मड़ाई को आसान बनाने की दिशा में भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा विकसित कृषि तकनीकें कृषकों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं। इसी क्रम में, संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में अनुसूचित जाति उपयोजना और फसल कटाई उपरांत इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना कार्यक्रमों के अन्तर्गत अल्मोड़ा जिले के खूंट, धामस और नौला गांवों में विशेष प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए।

इस जागरूकता अभियान में स्थानीय कृषकों ने अभूतपूर्व रुचि दिखाई। खूंट गांव में 27 (17 महिला, 10 पुरुष), धामस में 21 (5 महिला, 16 पुरुष) और नौला गांव में 19 (6 महिला, 13 पुरुष) कृषकों सहित कुल 67 प्रगतिशील कृषकों ने इसमें भाग लिया। इस सहभागिता में अनुसूचित जाति, बीपीएल श्रेणी और बड़ी संख्या में महिला कृषकों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी सार्थक बना दिया।

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कार्यक्रम के दौरान संस्थान के तकनीशियन श्री सुरेन्द्र सिंह ग्वाल ने कृषकों को अभिनव ‘विवेक मंडुवा थ्रेशर-कम-पर्लर’ की कार्यप्रणाली और इसके बहुआयामी उपयोग से अवगत कराया। मशीन के व्यावहारिक प्रदर्शन में कृषकों ने रूचि दिखाई। कृषकों को बताया गया कि इस आधुनिक मशीन से मंडुवे की मड़ाई बेहद आसान हो जाती है, जिससे पारंपरिक विधि में लगने वाले समय और शारीरिक श्रम की भारी बचत होती है। इसकी कार्यक्षमता सामान्य परिस्थितियों में 40 से 60 किलोग्राम प्रति घंटा और अनुकूल फसल परिस्थितियों में 60 से 80 किलोग्राम प्रति घंटा तक है।

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मंडुवे के साथ-साथ कृषकों को वी एल पैडल संचालित धान थ्रेशर की विशेषताओं से भी परिचित कराया गया। इसके संचालन का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखकर कृषकों ने इन मशीनों को पर्वतीय क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के लिए अत्यंत उपयोगी और समय की मांग बताया।

संस्थान और कृषकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय खेती में आधुनिक एवं श्रम-बचत तकनीकों को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम का समन्वयन फसल कटाई उपरांत इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार द्वारा किया गया।

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