Big Breking उत्तराखंड में यहाँ होटल निर्माण के लिए अंधाधुंध खुदाई बनी मुसीबत: भूस्खलन से भवन ढहा, बाल-बाल बची कई जानें

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Big Breking उत्तराखंड में यहाँ होटल निर्माण के लिए अंधाधुंध खुदाई बनी मुसीबत: भूस्खलन से भवन ढहा, बाल-बाल बची कई जानें

 

प्रशासन की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा; दो रेस्टोरेंट, खोखे और झुग्गियां खाली कराईं, व्यापारियों में भारी आक्रोश*

मसूरी। विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा देवी धाम के प्रवेश द्वार कद्दूखाल बाजार में व्यावसायिक निर्माण के चलते एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। यहाँ एक आलीशान होटल के निर्माण के लिए की जा रही पहाड़ी की गहरी खुदाई और लगातार हो रही बारिश के कारण अचानक भीषण भूस्खलन  हो गया। इस भूस्खलन की चपेट में आने से एक पुराना दोमंजिला भवन भरभराकर ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
गनीमत यह रही कि प्रशासन ने समय रहते खतरे को भांप लिया था और प्रभावित क्षेत्र को पहले ही खाली करा दिया था, जिससे एक भीषण तबाही और जनहानि टल गई। हालांकि, इस घटना के बाद से पूरे कद्दूखाल बाजार और आस-पास के ग्रामीणों में दहशत और भारी आक्रोश का माहौल है।
कैसे हुआ हादसा लापरवाही और बारिश का ‘डेडली कॉम्बिनेशन’
स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कद्दूखाल बाजार में पिछले कुछ समय से एक बड़े होटल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके लिए सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर पहाड़ी की वर्टिकल (सीधी) कटिंग की जा रही थी।

 

कमजोर हुई जमीन गहरी खुदाई के कारण पहाड़ का निचला हिस्सा पूरी तरह खोखला हो चुका था।
मूसलाधार बारिश का कहर पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण कटी हुई मिट्टी और चट्टानें बेहद कमजोर हो गईं।
अचानक ढहा मलबा देखते ही देखते ऊपरी हिस्से से भारी मलबा और बोल्डर (बड़े पत्थर) नीचे की ओर खिसकने लगे। इसकी चपेट में आने से पास ही स्थित पुराना भवन जमींदोज हो गया। भवन के गिरते ही बाजार में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।
‘देवदूत’ बनी प्रशासन की सतर्कता
इस पूरी घटना में राहत की बात सिर्फ यह रही कि स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम बेहद सतर्क थी। खतरे की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने समय रहते एक्शन लिया

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सुरक्षित रेस्क्यू मलबे की जद में आ रहे दो बड़े रेस्टोरेंट कई व्यावसायिक खोखे* और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की झुग्गियों को घटना से पहले ही पूरी तरह खाली करा लिया गया था।
गनीमत है कि किसी प्रकार की जनहानि होने से बच गया मुस्तैदी के कारण किसी भी इंसान या मवेशी को खरोंच तक नहीं आई।
निगरानी और पाबंदी सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। फिलहाल पूरे डेंजर ज़ोन की बैरिकेडिंग कर दी गई है और लोगों के वहां जाने पर सख्त रोक लगा दी गई है।
स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा सुरक्षा मानकों की सरेआम धज्जियां”
इस हादसे ने पर्वतीय क्षेत्रों में हो रहे अनियोजित और अंधाधुंध निर्माण कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों ने होटल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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ग्रामीणों और व्यापारियों का कहना है “धार्मिक पर्यटन के नाम पर कद्दूखाल जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों को कंक्रीट के जाल में बदला जा रहा है। सुरक्षा मानकों  का पालन किए बिना ही पहाड़ियों को बेरहमी से काटा जा रहा है, जो भविष्य में किसी बड़ी आपदा को न्योता दे रहा है। अगर प्रशासन ने समय पर दुकानें खाली न कराई होतीं, तो आज कई परिवारों के चिराग बुझ जाते।”

> आगे की कार्रवाई और मांग

स्थानीय जनता ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि:

 

इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच  कराई जाए।
बिना पुख्ता सुरक्षा दीवार बनाए खुदाई करने वाले दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में नए बड़े कमर्शियल निर्माणों की समीक्षा की जाए।
फिलहाल की स्थिति में प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। भूविज्ञानी और तकनीकी टीम द्वारा क्षेत्र का निरीक्षण किए जाने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ों पर ‘विकास बनाम विनाश’ की बहस को तेज कर दिया है।

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