दुःखद मणिपुर आतंकी हमले में शहीद वीर सपूत बलवंत सिंह खेतवाल पंचतत्व में विलीन; ‘अमर रहें’ के नारों से गूंजा लालकुआँ

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दुःखद  मणिपुर आतंकी हमले में शहीद वीर सपूत बलवंत सिंह खेतवाल पंचतत्व में विलीन; ‘अमर रहें’ के नारों से गूंजा लालकुआँ

नम आंखों से दी गई शहीद वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह को अंतिम विदाई, राजकीय सम्मान के
साथ हुआ अंतिम संस्कार

  असम राइफल्स के जांबाज बलवंत सिंह खेतवाल का सर्वोच्च बलिदान, उग्रवादियों के कायराना हमले में हुए थे शहीद

मणिपुर आतंकी हमला / शहीद बलवंत सिंह खेतवाल को नम आंखों से अंतिम विदाई

लालकुआँ। मणिपुर के उखरूल जिले में संदिग्ध उग्रवादियों के कायराना आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त हुए उत्तराखंड के वीर सपूत, वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल का पार्थिव शरीर गुरुवार को लालकुआँ स्थित उनके आवास पर पहुंचा। जैसे ही शहीद का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर उनके घर आंगन में आया, वैसे ही वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरा क्षेत्र “भारत माता की जय” और “शहीद बलवंत सिंह अमर रहें” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
शहीद बलवंत सिंह खेतवाल के अंतिम दर्शनों के लिए उनके आवास पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके बाद पूरे राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए चित्राशिला घाट ले जाया गया। सेना के जवानों ने मातमी धुन बजाकर और हवा में गोलियां दागकर अपने जांबाज साथी को अंतिम सलामी दी। इस भावुक क्षण के दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अमला, पुलिस प्रशासन, विभिन्न राजनैतिक दलों के जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने अश्रुपूरित आंखों से देश के इस वीर को विदाई दी।
### मणिपुर के उखरूल में हुआ था कायराना हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मणिपुर के उखरूल जिले के मुंगशांग खोंग क्षेत्र में असम राइफल्स की 40वीं बटालियन का काफिला गुजर रहा था। तभी घात लगाकर बैठे संदिग्ध उग्रवादियों ने पहले आईईडी (IED) विस्फोट किया और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। भारतीय जवानों ने भी इस हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया, लेकिन इस भीषण मुठभेड़ में असम राइफल्स के वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल और हवलदार चंद्रमोहन सिंह देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। 35 वर्षों तक की देश की अटूट सेवा
शहीद बलवंत सिंह खेतवाल मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के टूपेड (वन डूंगरा) गांव के रहने वाले थे।

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वर्तमान में उनका परिवार लालकुआँ के मोटाहल्दू स्थित अंबिका विहार (बकुलिया गांव) में रह रहा है। बलवंत सिंह वर्ष 1991 में असम राइफल्स में भर्ती हुए थे। अपने 35 वर्ष के लंबे और गौरवशाली सैन्य जीवन में उन्होंने देश के कई बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण इलाकों में अपनी सेवाएं दी थीं। अपनी बहादुरी, कड़े अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के लिए वे अपनी बटालियन और साथियों के बीच हमेशा एक मिसाल रहे। शोक में डूबा परिवार और पूरा प्रदेश शहीद बलवंत सिंह अपने पीछे पत्नी संगीता, एक बेटा और दो बेटियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके सर्वोच्च बलिदान की खबर मिलते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।

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 मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने जताया शोक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्यपाल ने शहीद बलवंत सिंह खेतवाल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने शहीद के सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र के लिए अमूल्य बताते हुए कहा कि देश अपने वीरों की इस शहादत को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया है। अंतिम संस्कार के समय हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी कि बलवंत सिंह का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और आने वाली पीढ़ियां उनकी वीरता से प्रेरणा लेती रहेंगी।

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