Almora News:गाय के घायल बछड़े का एक माह से चल रहा इलाज, गौशाला पहुंचने की मांग हुई तेज जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर ली स्थिति की जानकारी, पशु कल्याण को लेकर प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग

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अल्मोड़ा। संवाददाता।

ग्राम सभा शैलगूठ के पपरशैली क्षेत्र में एक गाय का बछड़ा बीते एक माह से घायल अवस्था में पड़ा हुआ था, जिसका इलाज लगातार पशु चिकित्सालय अल्मोड़ा में तैनात पैरावेट राहुल द्वारा किया जा रहा है। पशु प्रेमियों और जनप्रतिनिधियों की इस संवेदनशील पहल से क्षेत्र में पशु कल्याण के प्रति एक सकारात्मक संदेश गया है।

ग्राम पंचायत सदस्य कपिल मल्होत्रा ने बताया कि इस प्रकार के आवारा और बीमार पशुओं के लिए अब स्थायी समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही जिलाधिकारी से भेंट कर इस विषय में विस्तृत चर्चा करेंगे और शैलगूठ क्षेत्र से इन्हें गौशाला पहुंचाया जा सके, जहां इस तरह के घायल या बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित रखा जा सके।

नगर निगम के पार्षद अमित साह मोनू भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा, “गौसेवा हमारे समाज की संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। मैं हमेशा इसके लिए तत्पर रहा हूं और आगे भी रहूंगा। ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ समाज के प्रत्येक नागरिक को संवेदनशील होना चाहिए।”

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पूर्व सभासद जगमोहन बिष्ट ने कहा, “पशु भी इस समाज का हिस्सा हैं और इनकी सेवा करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। प्रशासन को चाहिए कि ग्राम स्तर पर गौशालाएं बनाई जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।”

इस अवसर पर पार्षद अभिषेक जोशी और सामाजिक कार्यकर्ता अक्षय राजपूत भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर घायल बछड़े के उपचार की प्रगति का जायजा लिया और वहां साफ-सफाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई। पैरावेट राहुल ने जानकारी दी कि बछड़े की हालत में अब काफी सुधार है और वह लगातार उसकी देखभाल कर रहे हैं।

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ग्रामवासियों ने भी जनप्रतिनिधियों और पशु चिकित्सा विभाग की तत्परता की सराहना की और मांग की कि ऐसे मामलों में त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए एक स्थायी तंत्र विकसित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर बेसहारा मवेशी सड़क किनारे या खेतों में घायल अवस्था में पड़े रहते हैं, लेकिन उचित व्यवस्था न होने के कारण उनकी देखभाल नहीं हो पाती।

जनप्रतिनिधियों की इस सामूहिक पहल ने क्षेत्र में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। साथ ही यह संदेश भी दिया है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करें तो बेसहारा पशुओं के जीवन में भी सुधार लाया जा सकता है। गौशाला की आवश्यकता को लेकर अब क्षेत्रीय जनों में भी जागरूकता बढ़ी है और उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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