Almora News :कसारदेवी को जोड़ने वाली सड़क के चौड़ीकरण के लिए देवदार के पेड़ों पर लगे लाल निशान,तो क्या देवदार के विशालकाय हरे पेड़ों पर चलेगी आरी?

0
ख़बर शेयर करें -

मानसखंड मंदिर मिशन माला के तहत कसारदेवी को जोड़ने वाली सड़क के चौड़ीकरण के लिए देवदार के पेड़ों पर लगे लाल निशानअल्मोड़ा। जागेश्वर के दारुक वन में सड़क चौड़ीकरण के लिए पौराणिक देवदार के पेड़ों के काटने का मामला अब तक शांत नहीं हुआ है।

अब कसारदेवी को जोड़ने वाली सड़क के चौड़ीकरण की कवायद शुरू होने के बाद यहां भी देवदार के हरे पेड़ों पर लाल निशान लग गए हैं। अंदाजा लगाया जा रहा है कि यहां भी सड़क चौड़ीकरण के लिए देवदार के विशालकाय हरे पेड़ों पर आरी चलेगी।

मानसखंड मंदिर मिशन माला के तहत जिले में जागेश्वर, कसारदेवी, सूर्य मंदिर कटारमल, चितई सहित अन्य मंदिरों का विकास होना है। इन मंदिरों को जोड़ने वाली सड़कों को बेहतर और चौड़ा बनाने की योजना है। कसारदेवी को जोड़ने वाली सड़क के चौड़ीकरण की कवायद शुरू हुई है। अल्मोड़ा नगर के पास कसारदेवी मंदिर और इसके आसपास सड़क किनारे हरे देवदार के विशालकाय पेड़ मौजूद हैं। यहां पपरशली के पास वन विभाग ने देवदार के कई पेड़ों पर लाल निशान लगा दिए हैं। हालांकि कितने पेड़ चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी देने से विभाग बच रहा है। लाल निशान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 30 से अधिक देवदार के पेड़ों पर आरी चलाने की तैयारी है। 

यह भी पढ़ें 👉  Weather Update :उत्तराखंड में मौसम का यू-टर्न: 6 जिलों में भारी बारिश और बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट, मैदानों में भी बदलेगा मिजाज

एक तरफ ईको पार्क, दूसरी तरफ पेड़ों पर लाल निशान

अल्मोड़ा। कसारदेवी के पपरशली में जिन पेड़ों पर लाल निशान लगे हैं यहां से कुछ मीटर की दूरी पर ईको पार्क है। यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और देवदार के विशालकाय पेड़ यहां की सुंदरता पर चार चांद लगाते हैं। ईको पार्क में कई पेड़-पौधों की कई प्रजातियों को संरक्षित करने की बात कही जाती है। जबकि यहां से कुछ ही दूरी पर संरक्षित प्रजाति के देवदार के पेड़ों पर लाल निशान लग चुके हैं।

यह भी पढ़ें 👉  Uttrakhand News:मुजफ्फरनगर पहुंचे सीएम धामी: रामपुर तिराहा के शहीदों को किया याद, कहा- श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता

कोट- कसारदेवी सड़क का चौड़ीकरण होना है। फिलहाल चौड़ीकरण की जद में आने वाले पेड़ों का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के बाद ही कितने पेड़ इसकी जद में आएंगे, यह स्पष्ट होगा। -सुनील कुमार, ईई, लोनिवि, प्रांतीय खंड, अल्मोड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *