Uttarakhand News:राजाजी टाइगर रिजर्व में पहली बार दिखा विलुप्त प्रजाति का हिरन, कैमरे में कैद हुई तस्वीर

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राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज में पहली बार विलुप्तप्राय शेड्यूल-वन का हिरन प्रजाति का प्राणी हॉग डियर (एक्सिस पोर्सिनस) यानी पाड़ा नजर आया है, जिसे रिजर्व प्रशासन जैव विविधता की दृष्टि से अच्छे संकेत मान रहा है। वहीं, इससे पहले उत्तराखण्ड में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में पाड़ा की उपस्थिति दर्ज की गई थी।

🔹पूर्वी भाग चीला रेंज में पाड़ा की तस्वीरें कैद हुई 

राजाजी में हॉग डियर का मिलना यहां के ग्रास लैंड डेवलपमेंट के बेहतर काम को दर्शाता है। अखिल भारतीय बाघ गणना के चौथे फेज के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व में लगाए गए ट्रैप कैमरा में पार्क के पूर्वी भाग चीला रेंज में पाड़ा की तस्वीरें कैद हुई हैं। राजाजी के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया, यहां हॉग डियर की उपस्थिति पार्क की बढ़ती जैव विविधता सीमा को दर्शाता है।

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🔹रिजर्व में विभिन्न स्थानों पर ट्रैप कैमरा लगाए गए 

उन्होंने रिजर्व में हॉग डियर की उपस्थिति का श्रेय उनके आवास में सुधार के लिए युद्धस्तर पर किए गए कार्यों को दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में विभिन्न आवास सुधार के कदम उठाए गए हैं। बडोला ने कहा, पार्क की जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए वनस्पति और शिकार को बढ़ाया जा रहा है, ताकि शाकाहारी और मांसाहारी दोनों को अपने आवास में रहने, प्रजनन करने और अपनी आबादी का विस्तार करने के लिए आदर्श स्थितियां मिलें। बताया, आवास सुधार कार्य के परिणाम देखने के लिए हाल ही में रिजर्व में विभिन्न स्थानों पर ट्रैप कैमरा लगाए गए हैं।

🔹उत्तराखंड में लगातार घट रही संख्या

वन विभाग के मुताबिक, सांभर, चीतल और बारहसिंघा की संख्या उत्तराखंड के जंगलों में ठीकठाक है। हिरण की इन प्रजातियों के अलावा हॉग डियर भी बाघ और गुलदार का प्रमुख आहार हैं, लेकिन उत्तराखंड में इनकी संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्ष 2018 में हुई गणना के अनुसार, कुमाऊं वेस्टर्न सर्किल के तहत आने वाली तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, रामनगर व हल्द्वानी डिवीजन में करीब 26 पाड़ा नजर आए थे।

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🔹सिर नीचे झुकाकर दौड़ता है पाड़ा

पाड़ा अपने सिर को नीचे झुकाकर दौड़ता है। वह अन्य हिरणों की तरह बाधाओं पर छलांग लगाने के बजाय नीचे छुपना पसंद करता है। एक परिपक्व पाड़ा का वजन लगभग 50 से 60 किलोग्राम तक होता है। पाड़ा के सिर पर तीन प्रकार के रंगों वाले सिंघ पाए जाते हैं।

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