Uttrakhand News:उत्तराखंड एसटीएफ का बड़ा एक्शन: देहरादून में अवैध कॉल सेंटर का पर्दाफाश, सिम बॉक्स से चल रहा था ठगी और ब्लैकमेलिंग का खेल

एसटीएफ उत्तराखंड ने एक ऐसे कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जहां से सिम बाक्स के माध्यम से ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने और तत्काल लोन देने के नाम पर उनसे उगाही करते थे।
एसटीएफ ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
आरोपितों की पहचान लक्ष्मण प्रसाद कंपनी मैनेजर निवासी सेखन फाटक, चरखारी स्टेट, महोबा, उत्तर प्रदेश, वर्तमान निवासी चंद्रबनी पटेलनगर और जगमोहन सिंह रावत कंपनी रीजनल मैनेजर निवासी माता चौक, रंगपुरी, थाना वसंत कुंज, नई दिल्ली के रूप में हुई है।
🌸संदिग्ध सिम बाक्स के संचालन की जानकारी
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि दूरसंचार विभाग की ओर से देहरादून में संदिग्ध सिम बाक्स के संचालन की जानकारी दी गई थी। जांच में सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों के विरुद्ध चक्षु पोर्टल पर शिकायतें दर्ज होना पाई गई।
शिकायत के आधार पर निरीक्षक आशीष गुसांई व त्रिभुवन रौतेला की देखरेख में टीम ने जीएमएस रोड, कमला पैलेस के निकट स्थित कैरियर हाउस बिल्डिंग में संचालित सिंह असिस्ट रिकान सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय में दबिश दी गई। जांच में टेलीकाम सेटअप दूरसंचार विभाग के निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित नहीं होना पाया गया।
कंपनी के कार्यालय में अवैध रूप से कॉल सेंटर संचालित किया जाना पाया गया। कार्यालय में कॉलिंग के लिए डिनस्टार कंपनी का 32 स्लाट वाला सिम बाक्स प्रयोग में लाया जा रहा था।
दूरसंचार विभाग की अधिकारी की ओर से सिम बाक्स की पुष्टि की गई। बताया गया कि उपकरण के माध्यम से कॉल की वास्तविक पहचान छिपाकर धोखाधड़ी एवं अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है तथा इसका प्रयोग दूरसंचार विभाग की निर्धारित गाइडलाइन का उल्लंघन है।
🌸45 सिम कार्ड बरामद
कंपनी के कार्यालय की तलाशी के दौरान विभिन्न स्थानों से कुल 45 सिम कार्ड जिसमें 43 बीएसएनएल, दो जियो व एक बोडाफोन कंपनी के सिम कार्ड सहित एक लैपटाप, दो फाइबर राउटर, तथा अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद किए गए।
लैपटाप की जांच में पाया कि आरोपित एसबीआइ, बैंक आफ बड़ोदा, एक्सिस बैंक, पूनावालां फाइनेंस, यश बैंक व आरबीएल आदि बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड से संबंधित डेटा सहित अन्य महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त हुआ। इस संबंध में विवेचना की जा रही है।
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि कॉल सेंटर से लोगों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने एवं उससे संबंधित लाभ बताने के नाम पर कॉल की जाती थी।
कई बार ग्राहकों से शीघ्र धनराशि जमा कराने के लिए धमकी भरे कॉल एवं गाली-गलौच कर दबाव बनाया जाता था, जिससे ग्राहक डरकर अपनी संवेदनशील जानकारी एवं धनराशि उपलब्ध करा देते थे। इसके अलावा कॉल सेंटर में लगभग 39 अन्य युवक-युवतियों को भी कार्य पर रखा गया था, जिन्हें कमीशन के आधार पर भुगतान किया जाता था।
🌸व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से ग्राहकों को करते थे ब्लैकमेल
जांच में यह बात भी सामने आई है कि कॉल सेंटर से भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राइ) की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार कस्टमर हेल्पलाइन की 1600 नंबर सीरीज का प्रयोग नहीं किया जा रहा था, बल्कि व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से ग्राहकों को कॉल कर ब्लैकमेल किया जाता था।
यह गतिविधियां प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी, प्रतिरूपण, पहचान संबंधी जानकारी के दुरुपयोग एवं दूरसंचार विभाग के निर्धारित मानकों के उल्लंघन से संबंधित पाए जाने पर पुलिस टीम ने कंपनी के मैनेजर एवं रीजनल मैनेजर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया है।