National News :नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल एंड ट्रेनिंग डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा:केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को घोषणा की है कि नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। मंत्री ने एनसीईआरटी के 63वें स्थापना दिवस पर अपने संबोधन के दौरान यह घोषणा की।

मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित एनसीईआरटी के 63वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम में यह घोषणा की है। संबोधन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल एंड ट्रेनिंग को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “आज मैं घोषणा करना चाहता हूं कि हम एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दे रहे हैं।” साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने “बच्चों को समग्र शिक्षा प्रदान करने” के लिए बाल भवनों और बाल वाटिका को एनसीईआरटी के साथ विलय करने का भी आह्वान किया।

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💠कैसे घोषित होती है डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी?

बता दें कि स्कूली शिक्षा के मामले में सरकार को सहायता और सलाह देने के लिए एनसीईआरटी की स्थापना 1961 में सोसायटी अधिनियम के तहत की गई थी। अधिनियम की मानें तो विश्वविद्यालयों के अलावा, पढ़ाई के किसी विशिष्ट क्षेत्र में बहुत हाई स्टैंडर्ड पर काम करने वाले हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशनल को यूजीसी की सलाह पर केंद्र सरकार द्वारा ‘डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी’ संस्थान घोषित किया जा सकता है। जो संस्थान ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ हैं, उन्हें भी यूनिवर्सिटी जैसे ही शैक्षणिक स्थिति और विशेषाधिकारों मिलते हैं। डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के साथ, एनसीईआरटी अपनी स्वयं की ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टरेट डिग्री देगी।

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💠”चंद्रयान-3 और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के बीच समानता”

धर्मेंद्र प्रधान ने 3 लैब का उद्घाटन किया जिसमें एक वर्चुअल रिएलिटी एजुकेएशन और दूसरी टीचर ट्रेनिंग सेंटर शामिल है। अपने संबोधन के दौरान शिक्षा मंत्री ने चंद्रयान-3 और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के बीच समानताएं बताईं और कहा कि नई शिक्षा नीति हालिया इसरो प्रोजेक्ट जितनी ही सफल होगी। प्रधान ने आगे कहा, “चंद्रयान-3 के सफल संचालन का श्रेय एनसीईआरटी को भी जाना चाहिए क्योंकि यहीं से ऐसे प्रोजेक्ट का विचार पनपता है।” “एनईपी चंद्रयान-3 की तरह है। यह सफल होगा। इसे कोई नहीं रोक सकता”

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