तिलपात्र एवं हवन के साथ कर्नाटक खोला की ऐतिहासिक रामलीला का भव्य समापन
तिलपात्र एवं हवन के साथ कर्नाटक खोला की ऐतिहासिक रामलीला का भव्य समापन
परंपरा, संस्कृति और आधुनिकता के संगम से चार पीढ़ियों की विरासत को नई उड़ान
अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा में धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में कर्नाटक खोला की ऐतिहासिक रामलीला एक नया अध्याय रच रही है। श्री भुवनेश्वर महादेव मंदिर एवं रामलीला समिति कर्नाटक खोला के तत्वावधान में आयोजित रामलीला का शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार, तिलपात्र एवं पूर्णाहूति हवन के साथ विधिवत एवं भव्य समापन हुआ।
यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान का प्रतीक बना, बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक समरसता और आधुनिक तकनीक का एक अनूठा संगम बनकर सामने आया।
चार पीढ़ियों की अटूट आस्था और समर्पण
कर्नाटक खोला की रामलीला केवल एक मंचन नहीं, बल्कि चार पीढ़ियों से चला आ रहा पारिवारिक और सामाजिक संस्कार है। समिति के संयोजक बिट्टू कर्नाटक के परिवार का रामलीला से चार पीढ़ियों से जुड़ाव इस बात का प्रमाण है कि यहाँ संस्कृति को जीवंत रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
“समय के साथ युवाओं का जुड़ाव पारंपरिक आयोजनों से कम न हो, इसके लिए परंपराओं की मूल आत्मा से समझौता किए बिना आधुनिक प्रयोग आवश्यक हैं।” — बिट्टू कर्नाटक, संयोजक
आधुनिक तकनीक से सजी रामकथा
बदलते समय में नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने के लिए इस वर्ष विशेष तैयारियाँ की गईं:
विशाल स्क्रीन: मंच पर 20 फीट लंबी और 10 फीट ऊँची स्क्रीन के माध्यम से दृश्यों का सजीव प्रदर्शन किया गया।
आधुनिक साउंड सिस्टम: उच्च गुणवत्ता वाली ध्वनियोजना से संवादों और प्रसंगों का प्रभाव कई गुना बढ़ गया।
दर्शक दीर्घा: दर्शकों और विशेषकर युवाओं व बच्चों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए दीर्घा में व्यापक सुधार किए गए।
सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों का संदेश
रामलीला के दौरान श्रीराम बनवास, भरत मिलाप, लंका विजय, रावण वध और अयोध्या वापसी जैसे महान प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। इन मंचनों के माध्यम से समाज में सत्य, मर्यादा, पारिवारिक मूल्यों, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया गया।
स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान कर समिति ने न केवल सांस्कृतिक संरक्षण किया, बल्कि स्थानीय प्रतिभा को निखारने का सराहनीय कार्य भी किया है।
समापन अनुष्ठान में उमड़ा जनसैलाब
धार्मिक अनुष्ठान और हवन के दौरान क्षेत्र के दर्जनों गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्य रूप से:
आयोजक व यजमान: बिट्टू कर्नाटक, सीमा कर्नाटक, मुख्य यजमान बद्री प्रसाद कर्नाटक, पंडित बृजेश कर्नाटक, देवेन्द्र कर्नाटक, तनोज कर्नाटक, दीपा कर्नाटक, कमलेश कर्नाटक, हंसा दत्त कर्नाटक।
समिति एवं नागरिक: कैलाश चंद्र तिवारी, पूरन चंद्र तिवारी, रमेश चंद्र जोशी, अमित कुमार, कमल पालीवाल, दीपक कर्नाटक, अभिषेक तिवारी, कोमल जोशी, गायत्री तिवारी, वैष्णवी जोशी, दीक्षा कर्नाटक, कंचन पांडे, कविता पांडे, आशा मेहता, सुनीता बगडवाल, हेम पांडे, देवेन्द्र गोस्वामी, अनिल जोशी, गीतांजलि, प्रकाश मेहता, आशु रौतेला, कपिल नयाल सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
तिलपात्र और हवन के साथ रामलीला का औपचारिक समापन भले ही हो गया हो, लेकिन श्रीराम के आदर्शों और सांस्कृतिक एकता की जो अलख कर्नाटक खोला में जगी है, वह जनमानस के दिलों में सदैव जीवंत रहेगी।
