हरीश रावत का धामी सरकार पर बड़ा हमला: रेखा आर्य और उनके पति को बताया ‘बबली-बंटी’, अमित शाह को दी खुली चुनौती
हरीश रावत का धामी सरकार पर बड़ा हमला: रेखा आर्य और उनके पति को बताया ‘बबली-बंटी’, अमित शाह को दी खुली चुनौती
बागेश्वर, हमारे विशेष संवाददाता
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बागेश्वर के एक दिवसीय दौरे के दौरान लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) गेस्ट हाउस में एक प्रेसवार्ता कर प्रदेश की धामी सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू पर सीधा निशाना साधते हुए दोनों की जोड़ी को ‘बबली-बंटी’ करार दिया और भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगाए।
‘बबली-बंटी’ की जोड़ी और 210 करोड़ की संपत्ति पर उठाए सवाल
प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तंज कसते हुए कहा कि जब ‘बबली’ (मंत्री रेखा आर्य) के पास 210 करोड़ रुपये की संपत्ति है, तो उनके ‘बंटी’ (पति गिरधारी लाल साहू) के पास कितनी संपत्ति होगी? उन्होंने गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी पर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि सरकार उन्हें जेल भेजकर उनका मुंह बंद कराना चाहती है, ताकि मंत्री से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर पर्दा डाला जा सके। इसके साथ ही उन्होंने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को भी अपने निशाने पर लिया।
अमित शाह को खुली चुनौती, कहा– ‘आरोप साबित हुए तो छोड़ दूंगा राजनीति’
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के देहरादून दौरे को ‘निराशाजनक’ करार देते हुए हरीश रावत ने भाजपा पर देवभूमि की आबोहवा को खराब करने और विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया। रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि उनके ऊपर लगाए गए तमाम आरोपों के सबूत सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने ऐलान किया कि यदि आरोप साबित हो जाते हैं, तो वह राजनीति से हमेशा के लिए इस्तीफा दे देंगे। साथ ही, उन्होंने अपने कार्यकाल के तीन साल के कामकाज पर भाजपा को सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी।
पलायन, बेरोजगारी और खनन के मुद्दे पर सरकार को घेरा
प्रदेश की मूल समस्याओं का जिक्र करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि उत्तराखंड में हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 15,000 बाखलियां (पारंपरिक घर) खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं और 200 गांव ‘घोस्ट विलेज’ (भूतिया गांव) बन चुके हैं।
उन्होंने आगे कहा कि खड़िया, लीसा, रेता और बजरी जैसे व्यवसायों में रोजगार के अवसर लगातार प्रभावित हो रहे हैं और खनन क्षेत्र में कुछ चुनिंदा लोगों का एकाधिकार स्थापित किया जा रहा है, जिससे आम जनता और स्थानीय युवाओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
