पत्रकार रूपेश कुमार पर हमला और गिरफ्तारी का मामला: उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने की कड़ी निंदा, निष्पक्ष जांच व रिहाई की मांग
पत्रकार रूपेश कुमार पर हमला और गिरफ्तारी का मामला: उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने की कड़ी निंदा, निष्पक्ष जांच व रिहाई की मांग
रुद्रपुर / अल्मोड़ा
‘अनसुनी आवाज’ के संपादक व पत्रकार रूपेश कुमार पर रुद्रपुर में हुए कथित हमले और तत्पश्चात उनके खिलाफ ही हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी किए जाने के मामले में राजनीति गर्मा गई है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपापा) ने इस पूरी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रदेश सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने कहा है कि रुद्रपुर में घटित यह पूरा मामला लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। पार्टी के अनुसार, सत्ता के दबाव में एकतरफा कार्रवाई की जा रही है।
पार्टी द्वारा उठाए गए सवाल
पीड़ित की सुनवाई नहीं: हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पत्रकार रूपेश कुमार की शिकायत पुलिस दर्ज नहीं कर रही है, जबकि दूसरी ओर उन पर ही हत्या के प्रयास जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
कानूनी अधिकारों का हनन: हिरासत के दौरान पत्रकार को उनके परिजनों, साथी पत्रकारों और अधिवक्ताओं से मिलने से रोका जा रहा है। पुलिस का यह रवैया उसके निष्पक्ष होने के दावों पर सवाल खड़े करता है।
विरोध में जुटे पत्रकार व कार्यकर्ता: घटना के विरोध में बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता रुद्रपुर थाने पहुंचे और पुलिस की मनमानी का विरोध किया।
“सवाल पूछने वाली आवाजों से डरी है सरकार”
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने कहा कि यह घटनाक्रम सरकार के उस ढोंग को उजागर करता है जिसमें वह लोकतंत्र बचाने का दावा करती है। पार्टी के अनुसार, सरकार निर्भीक पत्रकारिता और सत्ता से तीखे सवाल पूछने वालों से भयभीत है। लोकतंत्र में पत्रकारिता का मूल कार्य सरकार का गुणगान करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को सामने लाना और सत्ता को जवाबदेह बनाना है।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की मुख्य मांगें:
पत्रकार रूपेश कुमार की शिकायत पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
उन पर हुए हमले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।
पत्रकार के खिलाफ दर्ज मुकदमे की तत्काल निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें रिहा किया जाए।
उन्हें अधिवक्ताओं और परिजनों से मिलने सहित सभी कानूनी अधिकार अविलंब प्रदान किए जाएं।
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि सत्ता के दबाव में पुलिसिया कार्रवाई और स्वतंत्र पत्रकारिता की आवाज दबाने की कोशिश को लोकतंत्र में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
