उत्तराखंड नशा मुक्ति अभियान: युवाओं को नशे से बचाने के लिए उठाये जा रहे ठोस कदम

 

 उत्तराखंड नशा मुक्ति अभियान: युवाओं को नशे से बचाने के लिए उठाये जा रहे ठोस कदम

 

 

 

देहरादून: देश को नशामुक्त बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड सरकार लगातार मिशन मोड में कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राजधानी देहरादून के ओएनजीसी स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर ग्राउंड में ‘ड्रग-फ्री उत्तराखंड’ वॉकथॉन (मैराथन) का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस वॉकथॉन में स्वयं शिरकत कर और दौड़ लगाकर प्रदेशवासियों व युवाओं को एक कड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे इस जन-जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना और उन्हें एक स्वस्थ व सकारात्मक जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना है।

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‘नशे को ना, जिंदगी को हां’ का संदेश: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल एक सामान्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और जन-आंदोलन है। उन्होंने आह्वान किया कि इस संदेश को घर-घर तक पहुँचाना होगा तथा हर छात्र, युवा और बच्चे को इस मुहिम से जोड़ना होगा।

 

 

 

 

युवा पीढ़ी को सशक्त बनाने पर जोर: सीएम धामी ने कहा कि देश और समाज तभी मजबूत हो सकता है जब उसकी युवा पीढ़ी शारीरिक, मानसिक और वैचारिक रूप से स्वस्थ हो। युवाओं के हाथों में किताबें, खेल का मैदान और कौशल होना चाहिए, न कि नशा। नशे की लत न केवल युवाओं के सपने बल्कि पूरे परिवार और समाज को कमजोर करती है।

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सामूहिक जंग की जरूरत: सरकार का मानना है कि नशे के अवैध कारोबार और इसकी लत के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन अकेले नहीं जीत सकता, इसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आकर सामूहिक जिम्मेदारी निभानी होगी।

 

 

 

 

व्यापक कार्ययोजना: राज्य सरकार ने नशा मुक्ति के लिए स्कूलों में एंटी ड्रग सेल के गठन, हर जिले में सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों के विस्तार और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इसे एक ठोस रूप देना शुरू किया है ताकि प्रदेश को पूरी तरह से ड्रग-फ्री बनाया जा सके।

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