उत्तराखंड कांग्रेस में ‘महाभारत’: चुनाव से पहले छिड़ी ‘गृहयुद्ध’ की जंग, शैलजा का हरदा को फरमान— ‘रोको अपनी यात्रा!’

उत्तराखंड कांग्रेस में ‘महाभारत’: चुनाव से पहले छिड़ी ‘गृहयुद्ध’ की जंग, शैलजा का हरदा को फरमान— ‘रोको अपनी यात्रा!’

उत्तराखंड कांग्रेस में ‘महाभारत’: चुनाव से पहले छिड़ी ‘गृहयुद्ध’ की जंग, शैलजा का हरदा को फरमान— ‘रोको अपनी यात्रा!’

विशेष संवाददाता, देहरादून।
उत्तराखंड विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राज्य कांग्रेस का अंदरूनी घमासान सड़कों से निकलकर हाईकमान की चौखट तक पहुंच गया है। पार्टी की प्रदेश प्रभारी एवं महासचिव कुमारी शैलजा ने पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें सीधे तौर पर अपनी व्यक्तिगत ‘जनसंवाद यात्रा’ और समानांतर सियासी गतिविधियों पर तुरंत विराम लगाने का सख्त फरमान सुनाया है।


हाईकमान के इस कड़े रुख के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में शह-मात का खेल बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है।
‘एकला चलो’ की नीति पर शैलजा का करारा प्रहार
कुमारी शैलजा द्वारा जारी किए गए पत्र ने पार्टी के भीतर अनुशासन की धज्जियां उड़ने की पोल खोल दी है। पत्र में साफ लहजे में कहा गया है कि हरीश रावत जिस यात्रा के जरिए सियासी गोटियां फिट कर रहे हैं, उसकी भनक न तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष को है और न ही प्रभारी से कोई अनुमति ली गई है। इसे पार्टी के समानांतर अपनी ढपली-अपना राग अलापने की कोशिश करार दिया गया है।

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खबर के प्रमुख सियासी पहलू:
अनुशासन का चाबुक: बिना संगठन की सहमति के चलाई जा रही यह यात्रा पार्टी अनुशासन का स्पष्ट उल्लंघन है।

बयानों से बढ़ी तल्खी: रावत द्वारा दिए गए हालिया विवादित बयानों को लेकर नेतृत्व ने सख्त नाराजगी जताई है।

एकजुटता पर संकट: चुनावों से ठीक पहले गुटबाजी के इस खुले प्रदर्शन को हाईकमान ने पार्टी के चुनावी हितों पर सीधा हमला माना है।


हरीश रावत का पलटवार / प्रतिक्रिया:
हाईकमान का पत्र सामने आने के बाद रावत खेमे में भी हड़कंप मच गया है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने कहा: “मैं पार्टी का एक निष्ठावान सिपाही हूं और कांग्रेस को मजबूत करने के लिए ही जनता के बीच जा रहा था। यह कोई समानांतर यात्रा नहीं, बल्कि पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का एक प्रयास था। यदि प्रदेश प्रभारी और संगठन को लगता है कि इससे पार्टी का नुकसान हो रहा है, तो मैं उनके दिशा-निर्देशों का पालन करूंगा। हालांकि, अपनी बात शीर्ष नेतृत्व के समक्ष मजबूती से रखूंगा।”

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वेणुगोपाल के पाले में गेंद
शैलजा ने पत्र की प्रति सीधे संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल को भेजकर साफ कर दिया है कि अब यह मामला आलाकमान के पाले में है। एक तरफ हाईकमान का यह अनुशासनात्मक हंटर है तो दूसरी तरफ हरदा का जनाधार; ऐसे में देखना यह होगा कि क्या रावत अपने कदम पीछे खींचते हैं या उत्तराखंड कांग्रेस का यह गृहयुद्ध किसी नए सियासी भूचाल को जन्म देगा।