मिशन-2027 से पहले BJP का बड़ा दांव: दिनेश आर्य को राज्यसभा टिकट देकर साधे सियासी समीकरण, सीएम धामी की पकड़ मजबूत

मिशन-2027 से पहले BJP का बड़ा दांव: दिनेश आर्य को राज्यसभा टिकट देकर साधे सियासी समीकरण, सीएम धामी की पकड़ मजबूत

विशेष संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड की एकमात्र खाली हो रही राज्यसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नैनीताल के वरिष्ठ नेता और राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री) दिनेश आर्य के नाम का ऐलान कर दिया है। 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए संख्या बल के आधार पर दिनेश आर्य का संसद के उच्च सदन पहुंचना पूरी तरह तय माना जा रहा है। इस फैसले के साथ ही जहां राज्यसभा टिकट की रेस पर विराम लग गया है, वहीं राज्य की सियासत में ‘मिशन-2027’ को लेकर नया सियासी संदेश चला गया है।

1. सीएम धामी की सियासी पकड़ और ‘ग्राउंड वर्कर’ पर भरोसा

राजनीतिक गलियारों में दिनेश आर्य के मनोनयन को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की राज्य संगठन पर मजबूत पकड़ के रूप में देखा जा रहा है। साल 2021 में दिनेश आर्य ने धामी के जनसंपर्क प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी संभाली थी। जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देकर शीर्ष नेतृत्व ने संदेश दिया है कि वफादार और सुलभ नेताओं की अनदेखी नहीं होगी।

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2. दलित चेहरे पर दांव और सामाजिक संतुलन

दिनेश आर्य अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आते हैं। उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल-कुमाऊं के संतुलन के साथ-साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन साधना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है।

  • वर्तमान में राज्यसभा में प्रदेश से एक ओबीसी चेहरा (डॉ. कल्पना सैनी) और एक ब्राह्मण चेहरा (महेंद्र भट्ट) मौजूद हैं।
  • नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त होने पर दिनेश आर्य के रूप में दलित नेतृत्व को आगे बढ़ाकर पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग का मजबूत कार्ड खेला है।

3. ‘मिशन-2027’ की नींव और कुमाऊं का समीकरण

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कुमाऊं क्षेत्र (विशेषकर नैनीताल-हल्द्वानी बेल्ट) में संगठन को मजबूती देना बीजेपी की प्राथमिकताओं में शामिल है। आरएसएस (RSS) से लंबे समय से जुड़े रहे आर्य की संगठन और आम कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पैठ है। विपक्षी दलों के दलित वोट बैंक पर सेंध लगाने और जमीनी कार्यकर्ताओं को साधने में यह कदम गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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कैसा रहा है दिनेश आर्य का सियासी सफर?

  • संघ से जुड़ाव: 1982 से संघ के अलग-अलग वर्गों के जरिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरा नाता।
  • संगठन में अनुभव: ABVP नैनीताल के संयोजक (1986-88), BJYM नैनीताल के जिला मंत्री (1988-91), बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के जिलाध्यक्ष और बाद में राष्ट्रीय सचिव व पंजाब प्रभारी रहे।
  • जिलाध्यक्ष: 2007 से 2010 तक बीजेपी नैनीताल के जिलाध्यक्ष के रूप में संगठन को विस्तार दिया।
  • वर्तमान दायित्व: उत्तराखंड सरकार में पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री)।

सियासी सार: उत्तराखंड की एकमात्र सीट पर दिनेश आर्य को उतारकर बीजेपी ने न केवल अपने कैडर को यह संदेश दिया है कि ‘जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ता की अनदेखी नहीं होगी’, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक मजबूत सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन भी साध लिया है।

मिशन-2027 से पहले BJP का बड़ा दांव: दिनेश आर्य को राज्यसभा टिकट देकर साधे सियासी समीकरण, सीएम धामी की पकड़ मजबूत