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उत्तराखंड सरकार का नया प्रस्ताव

त्तराखंड सरकार सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) कर रहे डॉक्टरों के लिए सेवा नियमों में संशोधन करने की योजना बना रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो PG की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों को राज्य के सरकारी अस्पतालों में दो साल तक सेवा देना अनिवार्य हो सकता है।

🌸सेवा बॉन्ड की व्यवस्था

इस नई व्यवस्था के तहत, डॉक्टरों को एडमिशन के समय ही दो साल की अनिवार्य सेवा का बॉन्ड भरने के लिए कहा जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि PG के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली में उपलब्ध रहें।
एडमिशन के समय बॉन्ड पर हस्ताक्षर
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने इस नियम में बदलाव का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसके अनुसार, सरकारी मेडिकल कॉलेज में PG कोर्स में दाखिला लेने वाले MBBS डॉक्टरों से दो साल की सेवा का बॉंड लिया जाएगा।

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PG सीटों पर लागू होने की योजना

260 PG सीटों पर लागू करने की तैयारी
उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 260 PG सीटें हैं, और सरकार इन सभी सीटों को प्रस्तावित बॉंड व्यवस्था के तहत लाने की योजना बना रही है। एडमिशन के समय डॉक्टरों को सेवा से संबंधित शर्तों की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, प्रस्ताव में डॉक्टरों से सालाना 60 हजार रुपये की फीस लेने का भी प्रावधान है।

🌸विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने पर जोर
राज्य सरकार के सामने विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग 50 प्रतिशत पद खाली हैं।
सरकार का मानना है कि PG सीटों को सेवा बॉंड से जोड़ने से पढ़ाई पूरी करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं कुछ समय के लिए राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को मिल सकेंगी।

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🌸सरकार का निर्णय

सरकार के फैसले के बाद लागू होगी नई व्यवस्था
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अब इस पर सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जाना है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो सरकारी मेडिकल कॉलेजों में PG दाखिले लेने वाले डॉक्टरों के लिए दो साल की सरकारी सेवा से जुड़ी शर्त लागू की जा सकती है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने भी राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए PG एडमिशन के नियमों में बदलाव की तैयारी की जानकारी दी है।

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