Big News उत्तराखंड में ऐतिहासिक शैक्षिक सुधार: लागू हुआ ‘अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’, मदरसा बोर्ड एक्ट समाप्त
Big News उत्तराखंड में ऐतिहासिक शैक्षिक सुधार: लागू हुआ ‘अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’, मदरसा बोर्ड एक्ट समाप्त
देहरादून:उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और युगांतरकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में आज से “उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम” पूरी तरह से प्रभावी हो गया है। इस नए कानून के लागू होने के साथ ही पुराना ‘मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम’ और ‘गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम’ तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए हैं।
सरकार का यह कदम अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में जवाबदेही तय करने और छात्रों को मुख्यधारा की आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है।
📌 मुख्य बातें और बड़े बदलाव
समान मान्यता प्रणाली:अब प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान, निष्पक्ष और पारदर्शी मान्यता प्रणाली सुनिश्चित की जाएगी।
* *पुराने नियम समाप्त:** मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम और अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम अब पूरी तरह समाप्त हो गए हैं।
* आधुनिकता और राष्ट्र निर्माण:* नए अधिनियम के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
💡 आधुनिक और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था
सरकार का स्पष्ट मानना है कि राज्य के विकास के लिए एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है जो आधुनिक होने के साथ-साथ पारदर्शी और जवाबदेह भी हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार एक ऐसे शैक्षिक ढांचे के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर आधारित हो। “हमारा संकल्प स्पष्ट है कि प्रदेश का नौनिहाल आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल और भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाए।”
# 🌟 विज्ञान और तकनीक से सशक्त होंगे नौनिहाल
इस नए कानून के प्रभावी होने से अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों के लिए तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। अब उन्हें पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान (Science), प्रौद्योगिकी (Technology), और कौशल विकास (Skill Development) की उच्च स्तरीय शिक्षा मिल सकेगी। भारतीय जीवन मूल्यों के समावेश से तैयार यह नई व्यवस्था प्रदेश के बच्चों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाएगी।