सावधान क्या आप अपने बच्चों को चुप कराने या खाना खिलाने के लिए थमा देते हैं मोबाइल, बढ़ सकता इन चीजों का खतरा

आजकल एक नया ट्रेंड चल पड़ा है। अगर छोटा बच्चा रोता है तो माता-पिता उसे चुप कराने के लिए हाथ में मोबाइल पकड़ा देते हैं और उसमें वीडियो चालू कर देते हैं। वहीं कुछ माता-पिता बच्चे को खाना खिलाने के लिए भी उसके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं।

इससे बच्चा चुप तो हो जाता है। लेकिन धीरे-धीरे बच्चे को मोबाइल की इतनी आदत हो जाती है कि वह बिना मोबाइल देखे खाना ही नहीं खाता। लेकिन क्या आपको पता है कि यह आपके बच्चे की मानसिक सेहत के लिए अच्छा नहीं है। कई रिसर्च में इस बात का खुलासा हो चुका है कि मोबाइल की लत बच्चों के दिमाग पर गलत असर डालती है। इससे बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म का खतरा बढ़ रहा है। जानते हैं कि आखिर क्या है वर्चुअल ऑटिज्म और इससे बच्चों को कैसे बचाएं।

यह भी पढ़ें 👉  *छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र और युवाओं की आवाज पर हमला: भूपेंद्र सिंह भोज* अल्मोड़ा। दिल्ली में अपने भविष्य और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया जाना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। यह बात जिला कांग्रेस कमेटी अल्मोड़ा के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने कही। उन्होंने कहा कि देश के छात्र अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों ने लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है। ऐसे में सरकार को छात्रों की आवाज सुनकर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने के लिए पुलिस की लाठियां चलानी चाहिए। भूपेंद्र सिंह भोज ने कहा कि जिस देश में छात्र अपने भविष्य की चिंता लेकर संसद तक अपनी आवाज पहुंचाने जाते हैं, वहां उन्हें लाठियों से जवाब देना लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है। सरकार को यह समझना होगा कि छात्र देश का भविष्य हैं, अपराधी नहीं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार युवाओं को रोजगार, पारदर्शी परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य का भरोसा देने में विफल रही है। जब छात्र अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आवाज उठाते हैं, तो सरकार संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता अपनाती है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो तथा छात्रों की परीक्षा संबंधी सभी मांगों पर केंद्र सरकार तत्काल संवाद करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के छात्रों और युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है। युवाओं की आवाज को लाठी के बल पर दबाया नहीं जा सकता। संघर्ष जारी रहेगा और छात्रों के न्याय की लड़ाई को कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत से आगे बढ़ाएगी।

💠क्या है वर्चुअल ऑटिज्म

स्मार्टफोन, टीवी या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों में कई लक्षण दिखाई देते हैं। वर्चुअल ऑटिज्म का ज्यादा असर अक्सर 4-5 साल के बच्चों में देखने को मिलता है। मोबाइल फोन, टीवी और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की लत की वजह से ऐसा होता है। स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में बोलने और समाज में दूसरों से बातचीत करने में दिकक्त होने लगती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, इस कंडीशन को ही वर्चुअल ऑटिज्म कहा जाता है।

💠virtual autism in kids

वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षण

बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षणों की बात करें तो निम्म लक्षण दिखाई देते हैं।

💠हर थोड़ी देर में चिड़चिड़ाना

💠रिस्पॉन्स न करना

💠2 साल के बाद भी बोल न पाना

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💠फैमिली मेंबर्स को न पहचानना

💠नाम पुकारने पर

💠अनसुना करना

💠फैमिली मेंबर्स को न पहचानना

💠किसी से नजरेन मिलाना

💠एक ही एक्टिविटी को दोहराना

💠ऐसे बचाएं बच्चों को वर्चुअल ऑटिज्म से

पैरेंट्स को बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से दूर रखना चाहिए। गैजेट्स का जीरो एक्सपोजर बच्चों में रखना चाहिए। मतलब उन्हें पूरी तरह इससे दूर रखना चाहिए। अक्सर जब बच्चा छोटा होता है तो पैरेंट्स उन्हें पास बिठाकर मोबाइल फोन दिखाते हैं। बाद में बच्चों को इसकी लत लग जाती है। पैरेंट्स को सबसे पहले तो अपने बच्चों को इलेक्ट्रॉनिग गैजेट्स से दूर रखना है। उनका स्क्रीन टाइम जीरो करने पर जोर देना चाहिए। उनका फोकस बाकी चीजों पर लगाएं। स्लीप पैटर्न भी दुरुस्त करें। बच्चों को आउटडोर एक्टिविटीज के लिए प्रोत्साहित करें।

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