ग्राम घनेली में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया गया जागरूक

 

ग्राम घनेली में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया गया जागरूक

 

 

 

अल्मोड़ा : भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीПКएएस), अल्मोड़ा द्वारा सोमवार को विकासखंड हवालबाग के ग्राम घनेली में ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अमित ठाकुर एवं डॉ. रविशंकर ने कृषकों को ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने टिकाऊ खेती के लिए मिट्टी की सेहत बनाए रखने के तौर-तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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गोबर के वैज्ञानिक प्रबंधन और जैविक खाद पर जोर

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने पशुओं के गोबर के सही प्रबंधन और वैज्ञानिक भंडारण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। कृषकों को सलाह दी गई कि गोबर को खुले में रखने के बजाय सुरक्षित स्थान पर भंडारित करें, जिससे बारिश के पानी से इसके आवश्यक पोषक तत्व न बहें। गोबर को वैज्ञानिक विधि से सड़ाकर तैयार की गई गुणवत्तायुक्त जैविक खाद का उपयोग करने से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, उसकी संरचना सुधरती है और जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है। इसके अलावा, मिट्टी परीक्षण (सॉइल टेस्टिंग) के आधार पर ही संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग की सिफारिश की गई।

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किसानों ने उठाई सिंचाई व जंगली जानवरों की समस्या

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कृषकों ने खेती में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को भी साझा किया। किसानों ने क्षेत्र में सिंचाई के लिए जल संसाधनों की कमी तथा जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान को अपनी प्रमुख समस्या बताया।

 

 

 

कार्यक्रम का समापन एक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों ने किसानों की कृषि संबंधी जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान किया। इस अवसर पर कुल 16 कृषकों ने भाग लिया, जिनमें 12 महिला एवं 04 पुरुष कृषक शामिल थे।

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